दलमा जंगल में बेतला का बाघ कर रहा शिकार:3 माह से इलाके को बनाया ठिकाना, गौशाला के 15 पशु गायब; वन विभाग ने लगाए 40 कैमरे

दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी में बेतला टाइगर रिजर्व से आया एक बाघ पिछले तीन महीनों से घूम रहा है। बाघ की मौजूदगी से क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं। वन विभाग ने बाघ के होने की पुष्टि की है। विभाग के अनुसार बाघ को दलमा का वातावरण अनुकूल लग रहा है। पर्याप्त भोजन मिलने के कारण वह यहीं डेरा डाले हुए है। गौशाला के 15 पशु गायब दलमा शिव मंदिर की गौशाला में रखे पशुओं का बाघ शिकार कर रहा है। गौशाला के आटा बाबा उर्फ अनादि के अनुसार 60 से अधिक पशुओं में से 15 पशु अब तक गायब हो चुके हैं। वहीं दलमा रेंजर दिनेश चंद्रा ने बताया कि बाघ ने अब तक एक बैल और एक गाय का शिकार किया है। बाघ कुछ विशेष क्षेत्रों में ही घूम रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर उन क्षेत्रों को सील कर दिया गया है। पर्यटकों को वहां जाने की अनुमति नहीं है। बाघ की निगरानी में लगे 40 कैमरे वन विभाग ने बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जंगल के विभिन्न हिस्सों में 40 कैमरे लगाए हैं। विभाग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर रखे हैं। हांलाकि बाघ के होने का डर ऐसा है कि क्षेत्र के कांठजोड़, जोनाडीह, तुलीन, कदमझोर, मकुलाकोचा, टेंगाडीह समेत अन्य गांवों में डर का माहौल है। ग्रामीण जंगल में जलावन की लकड़ी लाने नहीं जा रहे हैं। मार्च में भी मिले थे बाघ की मौजूदगी के निशान इससे पहले दलमा और इसके आसपास के इलाके में मार्च के महीने में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। इसके बाद से वह नजर नहीं आ रहा था। बीते दिनों बाघ का लोकेशन टेंगाडीह के जंगलों में था। इससे आसपास के आठ गांवों के लोग दहशत में रह रहे थे। बाघ का लोकेशन जिस टेंगाडीह जंगल में बताया जा रहा था वह दलमा के पर्यटकों के आने वाले इलाके के पास है। बाघ की मौजूदगी का असर आसपास के गांव में रहने वाले लोगों के जीवनचर्या पर पड़ रहा था। ————————— बाघ से जुड़ी इस खबर को पढ़ें… दलमा के जंगल में बाघ की फिर वापसी:पश्चिम बंगाल से लौटा पलामू टाइगर रिजर्व का बाघ, ट्रैप कैमरे में कैद हुई तस्वीर पलामू टाइगर रिजर्व का बाघ एक सप्ताह बाद दलमा के जंगलों में वापस लौट आया है। वन विभाग ने ट्रैप कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद की है। बाघ पिछले एक सप्ताह से पश्चिम बंगाल के जंगलों में था। डीएफओ सबा आलम अंसारी के अनुसार, अभी तक बाघ द्वारा किसी जानवर का शिकार नहीं किया गया है। पिछले कुछ महीनों से यह बाघ दलमा और पश्चिम बंगाल के जंगलों के बीच आवाजाही कर रहा है। घाटशिला के सीमावर्ती इलाकों में भी इसकी गतिविधियां देखी गई हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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