प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन देवास ने प्रदेश संगठन के आह्वान पर पांच सूत्री मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि 30 से 40 साल से हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल जिस भवन में शिक्षा विभाग से मिली मान्यता के बाद संचालित हो रहे हैं, उनमें से कई विद्यालयों का रजिस्टर्ड किरायानामा नए नियम के कारण नहीं बन रहा है। इनमें स्लम एरिया, पट्टे की भूमि, ग्रामीण क्षेत्र आवासीय कॉलोनी अनाधिकृत कॉलोनी सम्मिलित है। उन्होंने ज्ञापन में बताया कि ऐसे विद्यालयों को नवीन किरायानामा के लिए पोर्टल संपदा- 2 से पृथक किया जाए। आरटीआई अधिनियम लागू होने पर पहली से 8वीं तक की मान्यता के लिए किसी भी प्रकार की मान्यता शुल्क एफडी रजिस्टर्ड किरायानामा अनिवार्य नहीं था। कक्षा एक से 8वीं तक के विद्यालयों से मान्यता शुल्क एफडी और रजिस्टर्ड किरायानामा को समाप्त करते हुए पूर्व अनुसार मान्यता दी जाए। आरटीई की राशि का भुगतान समय सीमा में किया जाए, यदि समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है तो प्रतिवर्ष की राशि ब्याज सहित स्कूलों को दी जाए, क्योंकि यदि स्कूलों द्वारा कोई कार्य किसी कारणवश समय पर नहीं किया जाता है तो शिक्षा विभाग द्वारा लेट फीस के नाम पर राशि वसूली जाती है। आरटीई प्रपोज में सम्मिलित छात्र, जो कि अन्य विद्यालयों में थे, उनका रुका हुआ भुगतान अनिवार्य रूप से शीघ्र किया जाए।


