जल जीवन मिशन (जेजेएम) में पाइपलाइन व टंकियों का काम किए बिना ही फील्ड इंजीनियरों ने ठेकेदारों को करोड़ों रुपए का फर्जी व एडवांस पेमेंट कर दिया। पाली प्रोजेक्ट के जवाई क्लस्टर चतुर्थ में अनियमितताओं पर कार्मिक विभाग ने पांच इंजीनियरों सहित छह अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन जयपुर ग्रामीण, बहरोड, अलवर, नीमकाथाना व दौसा सर्किलों में 55 करोड़ का एडवांस पेमेंट करने वाले 150 अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं हो पाई है। इस घोटाले की जांच में जिन तीन कमेटियों को जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने जांच से इनकार कर दिया। अब जेजेएम में फर्जी पेमेंट की जांच में आदेशों की प्रतीक्षा (एपीओ) वाले इंजीनियरों को लगाने की तैयारी है। जल भवन में 30 इंजीनियर एपीओ है तथा उनके पास कोई आवंटित काम नहीं है। जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी जेजेएम में फर्जी पेमेंट की जांच को लेकर गंभीर है। एडवांस कमेटी की जांच करने वाली तीन कमेटियों के इनकार के बाद सरकार ने अधीक्षण अभियंताओं से रिपोर्ट मांगी है। चीफ इंजीनियर (जेजेएम) की रिपोर्ट के तीन महीने बाद भी 150 इंजीनियरों व अधिकारियों की चार्जशीट व दोष तय नहीं हो पाए है। चीफ इंजीनियर अजय सिंह राठौड़ ने कोटपूतली-बहरोड, जयपुर ग्रामीण, अलवर, नीमकाथाना, दौसा सर्किलों के अधीक्षण अभियंता को दोषी अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए है। अधीक्षण अभियंताओं को पूरी रिपोर्ट 7 दिन में जलदाय मुख्यालय भिजवानी होगी। वहीं जांच से इनकार करने वाली कमेटियों पर भी विभाग कार्रवाई करेगी। सरकार ने फर्जी पेमेंट की जांच के लिए अधीक्षण अभियंता केके अग्रवाल, प्रदीप गुप्ता, विश्वजीत नागर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। लेकिन कमेटियों ने नियमों का हवाला देते हुए जांच से इंकार कर दिया।


