राजस्थान में नाबालिग बच्चियों की गुमशुदगी के मामले में सोमवार को डीजीपी यूआर साहू हाईकोर्ट में पेश हुए। जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा- पुलिस में डीएसपी स्तर तक के अधिकारी गुमशुदगी के मामलों को लेकर गंभीर नहीं हैं। हाईकोर्ट ने कहा- गुमशुदगी दर्ज होने के कई दिनों तक मामलों में जांच शुरू नहीं होती है। अगर इस तरह के मामलों में दो से तीन दिन में जांच शुरू हो जाए तो रिकवरी के चांस बढ़ जाते हैं। हाईकोर्ट ने कहा- हम पहले एसएचओ को बुलाते हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है। लेकिन, जैसे ही हम एसपी को बुलाते हैं, कार्रवाई शुरू हो जाती है। कई बार रिकवरी भी हो जाती है। ऐसे तो हम हर मामले में एसपी को बुलाना ही शुरू कर दें। प्रदेश में साढ़े 6 हजार लोग लापता
डीजीपी यूआर साहू ने कहा- हम प्रदेश में लापता लोगों को ढूंढने के पूरे प्रयास करते हैं। हमने 96 प्रतिशत मामलों में बरामदगी की है। प्रदेश में अभी करीब 6500 लोगों की बरामदगी शेष है। प्रदेश में गुमशुदगी के मामलों को लेकर एसओपी बनी हुई है। सरकार ने कहा- आईजी के स्तर पर सेल बनी हुई अदालत आज जयपुर जिले की चार अलग-अलग थाना क्षेत्र से गायब हुई नाबालिग बच्चियों के मामले में सुनवाई कर रही थी।
हाईकोर्ट ने कहा- हमने मीडिया में देखा है कि आईजी अजयपाल लाम्बा के नेतृत्व में पुलिस ने आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर 827 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस तरह के अभियान नाबालिग बच्चियों के मामले में क्यों नहीं चलाए जाते हैं? इस पर सरकार ने कहा कि हर जिले में आईजी के स्तर पर सेल बनी हुई है। इसे हम और एक्टिव करने का काम करेंगे। नाबालिग बच्चियों के लिए विशेष प्रयास हों
मामले से जुड़े वकील एनएस गुर्जर ने बताया- आज हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रदेश में नाबालिग बच्चियों की गुमशुदगी के मामलों में विशेष प्रयास होने चाहिए। अभी हो यह रहा है कि नामजद आरोपी होने के बावजूद पुलिस तीन-तीन महीने तक आरोपी के परिजनों से पूछताछ भी नहीं करती है।


