पूर्व विधायक के बयान के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन:ज्ञानदेव आहूजा के खिलाफ कार्रवाई की मांग, माफी नहीं मांगने पर आंदोलन की चेतावनी

चित्तौड़गढ़ में मंगलवार शाम को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा के विवादित बयान के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली के खिलाफ अशोभनीय और राम मंदिर में उनके प्रवेश को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर किया गया। भाजपा नेता आहूजा ने जूली के राम मंदिर में प्रवेश को “अपवित्र” करार देते हुए मंदिर में गंगाजल छिड़कने की बात कही थी, जिससे दलित समुदाय और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त हो गया। दलित विरोधी है बीजेपी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भैरूलाल चौधरी के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख चौराहों पर नारेबाजी करते हुए बीजेपी और ज्ञानदेव आहूजा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की विचारधारा हमेशा से ही दलित विरोधी रही है और यह बयान उसी मानसिकता का परिचायक है। भैरूलाल चौधरी ने बातचीत करते हुए कहा कि ज्ञानदेव आहूजा का बयान न केवल अपमानजनक है बल्कि संविधान और सामाजिक समरसता के भी खिलाफ है। उन्होंने कहा, “दलित समाज को नीचा दिखाना, उन्हें अपवित्र कहना और धार्मिक स्थलों में उनके प्रवेश को अपवित्र मानना, ये सब भाजपा की ओछी और संकीर्ण सोच का परिचय देता है। हम इस बयान की कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं।” माफी मांगने और कानूनी कार्रवाई की मांग की प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आहूजा का पुतला भी जलाया और उन्हें तुरंत माफी मांगने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भाजपा ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो राज्यभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस के स्थानीय नेता, कार्यकर्ता और दलित संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में इस प्रकार की जातिवादी और अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई। इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में जातीय और सामाजिक समानता को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने इसे दलितों के सम्मान से जुड़ा मामला बताया है और केंद्र व राज्य सरकार से आहूजा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन शांति पूर्ण रहा, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो संघर्ष और तेज होगा।

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