झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को रूफटॉप बार-रेस्टोरेंट संचालकों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दो बार-रेस्टोरेंट संचालकों को राहत दी है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने ग्रिका किचन एंड बार और प्राणा लाउंज की याचिका पर अलग -अलग सुनवाई की। याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने रांची नगर निगम के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तत्काल बार-रेस्टोरेंट को बंद करने का निर्देश दिया गया था। खंडपीठ ने निगम की इस कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी भी जताई। याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि उक्त दोनों बार एवं रेस्टोरेंट जिस बिल्डिंग में चल रहे हैं, उसका नक्शा रांची नगर निगम से स्वीकृत है। दोनों रेस्टोरेंट के किचन एवं स्टोर रूम स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के अंदर चल रहे हैं। रूफटॉप पर केवल बार एवं रेस्टोरेंट का संचालन हो रहा है, जहां स्थाई संरचना नहीं बनाई गई है। अस्थाई संरचना बनाकर कुर्सी- टेबल लगाए गए हैं। कोर्ट को बताया कि अग्निशमन विभाग से भी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिया गया है। इसके अलावा फूड सेफ्टी लाइसेंस, बार लाइसेंस भी लिया गया है। इसके बदले बाकायदा मोटा टैक्स दे रहे हैं। बार-रेस्टोरेंट को बंद करने के आदेश से वहां काम करने वाले और उससे जुड़े सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि रांची नगर निगम के पास रूफ टॉप बार रेस्टोरेंट के संचालन को लेकर कोई स्पष्ट कानून भी नहीं है। इसके बावजूद निगम ने बार-रेस्टोरेंट को बंद करने का निर्देश दे दिया।


