भास्कर न्यूज | राजनांदगांव स्टेट हाई स्कूल मैदान में कृपालुजी महाराज की प्रचारिका धामेश्वरी देवी की दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन शृंखला में बड़ी संख्या में श्रोता पहुंचे। अंतिम दिन वेद और शास्त्रों के प्रमाणों सहित बताया भगवद प्राप्ति 3 मार्गों को प्रशस्त किया गया जिसमें कर्म मार्ग, ज्ञान मार्ग और भक्ति मार्ग है। भगवद प्राप्ति के तीनों मार्गों में केवल भक्ति मार्ग सर्व सुगम, सर्व साध्य एवं सर्व श्रेष्ठ मार्ग है। प्रथम दो मार्गों का संक्षेप वर्णन कर बताया कि कर्म मार्ग में कर्मकांड की वेदों में घोर निंदा की गई है। इसका कारण यह बताया कि कर्मकांड से स्वर्ग की प्राप्ति होती है लेकिन स्वर्ग भी क्षणभंगुर है। कर्मकांड करना घोर मूर्खता है इस मार्ग के कड़े नियमों का सही पालन न करने वाले यजमान का नाश होता है। लेकिन ज्ञान मार्ग पर चलना कलयुग में मुश्किल है। संसार से पूर्ण विरक्त व्यक्ति ज्ञान मार्ग में अधिकारी बनेगा। दूसरी बात ज्ञानी भगवान की शरण में नहीं जाता और नियम है कि सगुण साकार भगवान के शरणागत होने पर माया निवृति हो सकती है। ज्ञानी का ज्ञान मार्ग में पतन होता है जिसकी रक्षा करने वाला नहीं भगवान होता है नहीं गुरु होता है। भक्ति का मार्ग सरल है इसमें कोई नियम नहीं वेदों में भक्ति से युक्त कर्म, धर्म की प्रशंसा की गई है एवं भक्ति से रहित कर्म धर्म निंदनीय बताया गया है। भक्ति मार्ग बड़ा सरल है इसमें सभी अधिकारी है और भक्ति में कोई नियम नहीं है कि कैसे भक्ति करो। कर्म में नियम है विधि-विधान जरूरी है। भक्ति मार्ग में नियम है कि कामना शून्य भक्ति होनी चाहिए। यानी निष्काम और अनन्य हो। राधा कृष्ण की भक्ति निष्काम होकर करनी होगी।


