नंबरों से आगे की तैयारी, बच्चे सीख रहे असल जिंदगी के हुनर

शहर में प्लस-2 की पढ़ाई कर रहे कई छात्र हाल ही में बोर्ड एग्जाम देकर फुर्सत में आए हैं। लेकिन पैरेंट्स उन्हें इस समय खाली नहीं छोड़ रहे, बल्कि पब्लिक स्पीकिंग, स्टेज डेयरिंग, कम्युनिकेशन और सोशल बिहेवियर जैसी स्किल्स सिखाने में जुट गए हैं। पैरेंट्स का मानना है कि बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखना ठीक नहीं, उन्हें समाज के साथ तालमेल और आत्मविश्वास से आगे बढ़ना भी आना चाहिए। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की ट्रेनिंग क्लासेस का सहारा लिया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैरेंट्स अब समझ चुके हैं कि बच्चों को सिर्फ नंबर लाने तक सीमित करना उनके भविष्य के साथ समझौता है। इसलिए अब वे उन्हें बोलना, समझाना, समाज से जुड़ना और खुद को कॉन्फिडेंटली प्रेजेंट करना सिखा रहे हैं। इस पहल से बच्चों में पढ़ाई के साथ-साथ असल जिंदगी के हुनर सीखकर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी आ रहा है। काउंसलर और मोटिवेशनल ट्रेनर अमन भाटिया ने बताया कि बच्चों को स्किलफुल बनाना अब सिर्फ उनके करियर का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि ये उनकी मेंटल ग्रोथ और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट का भी अहम जरिया है। पैरेंट्स समझ चुके हैं कि अगर बच्चा आत्मविश्वासी है, दूसरों से बेझिझक संवाद कर पाता है तो वह आगे चलकर हर मोर्चे पर बेहतर कर सकता है। इसी सोच के चलते बोर्ड एग्जाम के बाद खाली समय को पैरेंट्स ने बच्चों की रियल लाइफ स्किल्स की ट्रेनिंग के लिए एक मौका बना लिया है। शहर में ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ी है जो पब्लिक स्पीकिंग, स्टेज डेयरिंग, कम्युनिकेशन स्किल्स जैसी ट्रेनिंग ले रहे हैं। केस 1: मोबाइल से बाहर निकाला, अब कॉन्फिडेंस से बोलता है: मॉडल टाउन की एक महिला बताती हैं कि उनके बेटे ने कॉमर्स स्ट्रीम से प्लस-2 का एग्जाम दिया है। पहले वह सिर्फ पढ़ाई और मोबाइल तक सीमित था। एग्जाम के बाद उन्होंने उसे एक लोकल कोचिंग सेंटर में पब्लिक स्पीकिंग और बॉडी लैंग्वेज क्लासेस दिलवाना शुरू किया। अब वह बिना हिचक के बोल पा रहा है। केस 2: अब ऑनलाइन ग्रुप में सबसे एक्टिव: सराभा नगर की एक महिला ने बताया कि उनकी बेटी ने ह्यूमैनिटीज में प्लस-2 की पढ़ाई पूरी की है। वह बहुत इंट्रोवर्ट थी, इसलिए उन्होंने उसे ऑनलाइन ग्रुप कम्युनिकेशन कोर्स से जोड़ा। पहले परिचितों से भी नजरें चुराती थी, अब ऑनलाइन मीटिंग्स में बढ़-चढ़कर बोल रही है। केस 3: थिएटर वर्कशॉप से आत्मविश्वास मिला: गिल कॉलोनी के एक पिता कहते हैं कि उनका बेटा बोर्ड एग्जाम के बाद पूरा दिन मोबाइल में लगा रहता था। उन्होंने उसे पब्लिक स्पीकिंग वर्कशॉप जॉइन करवाई, जिससे वह ग्रुप में बात करना, एक्सप्रेशन देना और सामने वाले को प्रभावित करना सीख रहा है। अब उसका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। केस 4: ग्रूमिंग क्लब से टीमवर्क व लीडरशिप सीखी: दुगरी फेस-2 की एक महिला बताती हैं कि उनके बेटे ने साइंस स्ट्रीम से 12वीं के एग्जाम दिए हैं। वो पढ़ाई में अच्छा है, लेकिन लोगों से घुलता नहीं। उन्होंने उसे हर रविवार होने वाले एक पर्सनलिटी ग्रूमिंग क्लास में भेजना शुरू किया, जहां बच्चे आपस में बात करते हैं, छोटे-छोटे भाषण देते हैं और लीडरशिप स्किल्स सीखते हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *