भास्कर न्यूज | कवर्धा ग्राम पंचायत कुसुमघटा के निवासी लेखराम वर्मा को अपनी ही निजी जमीन पर मकान बनाना महंगा पड़ गया। खसरा नंबर 366/2, रकबा 0.0154 हेक्टेयर (38 डिसमिल) पर निर्माण कार्य शुरू किया था। लेकिन कुछेक प्रभावशाली लोगों ने इसे सरकारी जमीन बताकर आपत्ति कर दी। आरोप है कि प्रशासन ने भी बिना जांच के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। अब तक पांच बार पटवारी और आरआई ने मौके पर नाप किया। शिकायतकर्ता एक बार भी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बावजूद प्रशासन ने निर्माण की अनुमति नहीं दी। हाल ही में हुए नक्शा बटांकन में यह स्पष्ट हुआ कि मूल खसरा नंबर 366 की कुल जमीन 3 एकड़ 40 डिसमिल है। बटांकन में 21 डिसमिल जमीन कम पाई गई। ऐसे में जब निजी जमीन ही कम है, तो सरकारी जमीन पर कब्जे का सवाल ही नहीं उठता। पीड़ित लेखराम वर्मा की 38 डिसमिल जमीन अब तक चिन्हित नहीं हो पाई है। प्रशासन तारीख पर तारीख देता रहा। पीड़ित दो साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। अब वह इच्छा मृत्यु की मांग करने पर मजबूर हो गया है। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय करने की मांग की पीड़ित ने ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंच न्याय की गुहार लगाई है। गांव के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि लेखराम वर्मा को जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे कड़ा कदम उठाएंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में गुलशन वर्मा, शिवप्रसाद वर्मा, छवि वर्मा, सरपंच कन्हैयाराम कुर्रे, उपसरपंच ध्रुव वर्मा, पंच अश्विनी वर्मा, प्रवीण वर्मा, महेतरु यादव, धरमू साहू सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।


