शिक्षा नीति में विकल्प-फिर भी मॉडल स्कूलों में केवल साइंस:40 प्रतिशत स्टूडेंट 11वीं-12वीं के लिए छोड़ रहे मॉडल स्कूल की पढ़ाई

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्टूडेंट्स को बहुविकल्पीय विषय चुनने की स्वतंत्रता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। अरांई ब्लॉक में संचालित स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल में दसवीं के बाद केवल विज्ञान विषय ही उपलब्ध है। इससे अन्य विषयों में रुचि रखने वाले स्टूडेंट्स को स्कूल बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। निजी स्कूलों में दाखिला उनकी मजबूरी बनता जा रहा है। किशनगढ़ के अलावा जिले में मसूदा, पीसांगन और श्रीनगर के साथ प्रदेश में 134 मॉडल स्कूल संचालित है। हालांकि, मॉडल स्कूल का कॉन्सेप्ट केन्द्र में मनमोहन सरकार के समय ग्रामीण क्षेत्र में साइंस में स्टूडेंट्स का कौशल निखारने के लिए आया था, लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव नहीं आ पाया है। स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल योजना पूर्ववर्ती मनमोहन सरकार के समय अस्तित्व में आई थी। राज्य में मॉडल विद्यालयों के संचालन की शुरुआत वर्ष 2014-15 से की गई। शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े 134 ब्लॉक में 134 स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल संचालित हैं। वर्ष 2014-15 में 66, वर्ष 2015-16 में पांच, वर्ष 2016-17 में 61, वर्ष 2017-18 में 2 स्कूल शुरू किए गए थे। इन स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा दी जाती है, लेकिन यहां केवल विज्ञान संकाय ही उपलब्ध है। जो विद्यार्थी कला या वाणिज्य संकाय में आगे पढ़ाई करना चाहते हैं, उन्हें स्कूल छोड़कर अन्य जगह जाना पड़ता है। इन स्कूलों में दसवीं के बाद विज्ञान विषय लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या औसतन 50 प्रतिशत से अधिक है। शेष लगभग 35 से 40 प्रतिशत स्टूडेंट्स अन्य विषयों में रुचि के चलते स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। मॉडल स्कूलों में विषयों की सीमितता के कारण विद्यार्थियों के कॅरियर विकल्प सीमित हो रहे हैं। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत सरकार ने छात्रों को विषय चयन की पूरी स्वतंत्रता देने की बात कही है। उच्च शिक्षा में छात्र किसी भी विषय का चुनाव कर सकते हैं, लेकिन मॉडल स्कूलों में यह स्वतंत्रता नहीं मिल रही है। इन स्कूलों की शुरुआत केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त वित्तीय भागीदारी से हुई थी, लेकिन वर्तमान में केवल राज्य सरकार ही इनका संचालन कर रही है।

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