छत्तीसगढ़ के धमतरी में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। संयुक्त मोर्चा ने इस दिन को ज्ञान दिवस के रूप में मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर आदिवासी, सतनामी और बौद्ध महासभा सहित विभिन्न समाजों के लोग शामिल हुए। इसके बाद करीब 3 किलोमीटर लंबी रैली निकाली गई। रैली अंबेडकर चौक से शुरू होकर छत्रपति शिवाजी चौक, घड़ी चौक, गोलबाजार, सदर बाजार, गणेश चौक, रामबाग, बिलाई माता मंदिर होते हुए अंबेडकर भवन में संपन्न हुई। रैली में युवतियों ने बस्तरिया नृत्य और पंथी नृत्य प्रस्तुत किया, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। संयुक्त मोर्चा ने बताया कि इस महारैली का उद्देश्य समाज में भाईचारा, समानता और बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब की जयंती केवल एक वर्ग विशेष के लिए नहीं है, बल्कि यह पूरे भारतवर्ष के नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भारतीय संविधान सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, जिसमें महिलाओं, बच्चों और समाज के हर तबके की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। भागवत और रामायण की तरह संविधान का अध्ययन जरूरी उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लोग भागवत गीता और रामायण का अध्ययन करते हैं, उसी प्रकार संविधान का भी अध्ययन जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने मौलिक अधिकारों को समझ सके। इस रैली के माध्यम से एक संदेश पूरे देश में देने का प्रयास किया गया है, और भविष्य में इससे भी भव्य आयोजन की योजना है। मोर्चा ने भविष्य में और भी भव्य रैली के आयोजन की घोषणा की। जयंती पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित जयंती के मौके पर तीन दिवसीय कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। पहले दिन भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, जिसमें लगभग 120 लोगों ने स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाया। दूसरे दिन बच्चों के लिए चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया। तीसरे और अंतिम दिन भव्य महारैली के साथ जयंती का मुख्य आयोजन संपन्न हुआ। संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे बाबा साहब की जयंती को ‘ज्ञान दिवस’ के रूप में मनाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान देश के सभी नागरिकों को समता, समानता और बंधुत्व की भावना प्रदान करता है और यही देश का असली सुरक्षा कवच है। इस आयोजन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बौद्ध महासभा, आदिवासी समाज, सतनामी समाज और अन्य सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही।


