बड़वानी। निमाड़ अंचल की गोद से होकर बहने वाली प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा का जल प्रवाह बांध के कारण थम गया है। वर्षाकाल और बांध के गेट खोलने पर ही पानी में हलचल नजर आती है। वर्ष के आधे माह या उससे अधिक समय तक पानी स्थिर स्थिति में रहता है। ऐसे में नर्मदा को प्रदूषण से बचाने के लिए विभिन्न समिति-संगठन व श्रद्धालु जागरूक होकर कार्य कर रहे है। जिला मुख्यालय के पास बैकवॉटर किनारे से नर्मदा में स्वच्छता संदेश दिया जा रहा है। दरअसल वर्ष 2017 से सरदार सरोवर बांध को भरने की शुरुआत हुई थी। उसके बाद से नर्मदा का पानी वर्ष में कई माह रोकने का सिलसिला शुरू किया गया। वर्ष 2019 से वर्ष में लगभग 8 से 9 माह तक बैकवॉटर थमी स्थिति में रहती है। वर्षाकाल में ही ऊपरी बांधों का पानी छोड़ने पर पानी एक-दो या तीन माह तक बहाव की स्थिति में आता है। ऐसे में नर्मदा जल और तटीय क्षेत्र को स्वच्छ रखने के लिए नर्मदा भक्तों और समितियों द्वारा जागरूकता का परिचय दिया जा रहा है। पूजन-दर्शन व स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के जूते-चप्पल भी 20 से 25 फीट दूरी पर लाइनिंग कर रखवाए जाते है। तट पर प्रतिदिन समिति सदस्य और नर्मदा दर्शन करने वाले श्रद्धालु उत्साह से झाड़ू थाम सफाई करने से नहीं चूकते। जबकि प्रत्येक शनिवार व रविवार को सामूहिक रुप से सफाई अभियान चलता है। तट पर कार्यरत रोहिणी सेवार्थ सामाजिक संस्था के सचिन शुक्ला ने बताया कि बीते एक दशक पूर्व से राजघाट पुराने घाट के समय से साफ-सफाई का अभियान शुरू किया था, जो अब जन अभियान बन चुका है। मां नर्मदा की सफाई के प्रति प्रत्येक भक्त सहभागिता करते है। वर्ष में 6 से 8 माह बैकवॉटर में प्राचीन घाट डूबा रहता है। ऐसे में बैकवॉटर के किनारे पर सफाई व्यवस्था जारी रखी जाती है। हालांकि कचरे का नगर पालिका द्वारा प्रतिदिन उठाव नहीं किया जाता। ऐसे में बैकवॉटर किनारे गड्ढे में एकत्रित करना पड़ता है। नगर पालिका से भी मांग की है कि दिन में कम से कम एक बार कचरा वाहन राजघाट किनारे पहुंच जाए, तो कचरा ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा जा सके। नर्मदा तट पर वर्षभर विभिन्न पर्वो पर पूजन-दर्शन व स्नान करने वालों की भीड़ उमड़ती है। कई मौकों पर उत्सवी माहौल रहता है। नर्मदा की सफाई के प्रति समिति द्वारा मुनादी की जाती है। जूते-चप्पल तट से दूरी उतरवाए जाते है। कागज, पन्नी, पॉलीथीन आदि प्रतिबंधित सामग्री नर्मदा से दूर ही रखवाई जाती है। वर्षाकाल के बाद से फरवरी माह तक प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में परिक्रमा वासी भी आवाजाही करते है। वहीं तट पर जैसे-जैसे बैकवॉटर कम होता है, आगे सफाई कार्य किया जाता है। फरवरी माह के अंत तक पुराना घट खुलने की स्थिति में धुलाई और रंगाई-पुताई कर रोहिणी तीर्थ को स्वच्छ किया जाता है।


