राजधानी में हाल ही में विरोधी दल का बड़ा शक्ति प्रदर्शन हुआ। इसमें प्रदेशभर से पार्टी कार्यकर्ता आए। उम्मीद के मुताबिक भीड़ जुटी। पुराने सरकार भी शामिल हुए। लेकिन महज 3 मिनट 21 सेकंड का भाषण देकर रवाना हो गए। मंच पर इतने नेता बैठे कि समझ ही नहीं आ रहा था कि पार्टी के सीनियर लीडर बैठे कहां हैं? खैर, सब कुछ ठीक ठाक चला। एक के बाद एक, नेताओं ने भाषण दिया। लेकिन, भाषण खत्म होने के बाद जब प्रोटेस्ट का वक्त आया तो नेताओं ने ऐलान कर दिया कि हम सब लोग एक पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे हैं। प्रशासन की बंदिशों के चलते कार्यक्रम यहीं खत्म किया जाता है। ये सुनते ही जोश के साथ भोपाल आए कार्यकर्ताओं ने अपने नेताओं को जमकर कोसा। इधर, विरोधी कह रहे हैं कि जिस पार्टी का प्रोग्राम था, उसके यंग लीडर्स एक-दूसरे की टांग खिंचाई में लगे हैं। इनकम टैक्स छापे से सकते में ब्यूरोक्रेट्स
राजधानी में तीन बिल्डर्स के यहां आयकर विभाग के छापे के बाद पूर्ववर्ती सरकार में मुख्य सचिव के करीबी रहे कई आईएएस अधिकारी इस समय सकते में हैं। इन अफसरों ने छापे की जद में आए एक बिल्डर के माध्यम से प्रॉपर्टी और बेनामी संपत्ति में खासा निवेश किया है। सुना है कि आयकर अफसरों को प्रमुख सचिव स्तर के कुछ अफसरों के नाम भी पता चले हैं। इसलिए भी ये अधिकारी छापे की हर एक्टिविटी वॉच कर रहे हैं। साथ ही दुआ कर रहे हैं कि वो किसी संकट में न फंसें। मंत्री ने बंद कराया ‘टालमटोल’ का सिस्टम
एक मंत्री जी ने अपने डिपार्टमेंट में सालों से चली आ रही परंपरा बंद कर दी है। विधायकों के सवालों के जवाब में कई बार अधिकारी ‘जानकारी एकत्रित की जा रही है’ लिखकर कागजी खानापूर्ति कर देते थे। कई सालों से पूरी जानकारी के साथ जवाब नहीं मिलते थे। मंत्री जी को जैसे ही अफसरों की चतुराई पकड़ में आई, उन्होंने साफ कर दिया कि ये सिस्टम मेरे विभाग में नहीं चलेगा। मंत्री ने कह दिया कि जानकारी जैसी है, वैसी दी जाए। अगर कोई गड़बड़ी है तो वह भी जानकारी में दी जानी चाहिए। ताकि सच्चाई पता चल सके और सिस्टम में सुधार हो सके। मंत्री जी ने अपने ही विभाग के दो अफसरों पर चाबुक भी चला दिया है। अब बाकी अफसर टेंशन में हैं। अब अफसर जवाब और जानकारी मंत्री जी के सामने ले जाने से पहले क्रॉस चेक कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष को बता दिया महिला विरोधी
सत्ताधारी दल की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के वॉट्सऐप ग्रुप में एक महिला नेता ने बवाल मचा दिया। उन्होंने प्रेसिडेंट मैडम को ही महिला विरोधी बता दिया। ग्रुप में लिखा- महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष, राज्यसभा की सांसद जी बताइए..आप महिला होते हुए महिला की विरोधी क्यों हैं? आपने एक ऐसी महिला का विरोध किया है, जो अपने बच्चों के साथ अकेले संघर्ष कर रही है। बताइए, आप खुद के मंडल में महिलाओं की दुर्गति क्यों कर रहीं हैं? इस पोस्ट के बाद ग्रुप की सेटिंग चेंज कर दी गई है। वैसे पार्टी में कैडर के बदलाव का मौसम है, लिहाजा प्रमोशन की आस में बैठे नेता हर तरह के दांव आजमा रहे हैं। चुनावी चैतुओं को नहीं मिलेंगे टिकट
वैसे तो एमपी में तीसरे दल को पब्लिक ने कभी ज्यादा महत्व नहीं दिया। लेकिन करीब डेढ़ दर्जन विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां तीसरे दल प्रभावी रहे हैं। यहां यूपी से आए नेता चुनाव लड़ते हैं। बीते दिनों थर्ड फ्रंट की टॉप लीडरशिप की मीटिंग हुई। जिसमें एमपी के पार्टी चीफ ने पार्टी सुप्रीमो से साफ कह दिया कि अब चुनावी चैतुओं को चुनाव में टिकट देने की बजाय स्थानीय कार्यकर्ताओं को ही इलेक्शन लड़ाना चाहिए। ये परंपरा ठीक नहीं हैं कि लोग दूसरे राज्य से चुनाव लड़ने आए और चुनाव के बाद यहां से गायब हो जाएं। स्टेट चीफ ने कहा- लोकल कार्यकर्ता कब तक दूसरों के लिए चुनाव में दरी बिछाता रहेगा। स्टेट चीफ के इस वक्तव्य के बाद पार्टी के एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष की टेंशन बढ़ सकती है। श्रद्धांजलि के लिए अपने ही नेता को भूले
विधानसभा सत्र के पहले दिन दिवंगत नेताओं और विभूतियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस बार के सत्र में सत्ताधारी दल के दिवंगत मुखिया का नाम दैनिक कार्यसूची में नहीं आया। यह कार्यसूची जब रूलिंग पार्टी के नेताओं और दिवंगत लीडर के परिवार तक पहुंची तो आपत्ति विधानसभा सचिवालय तक पहुंचाई गई। बाद में दूसरी कार्यसूची जारी कर दिवंगत नेता का नाम शामिल किया गया। ये मानवीय भूल या लिपिकीय त्रुटि हो सकती है। लेकिन इसे भी राजनैतिक गलियारों में अलग नजरिए से देखा गया। रास्ता भटककर विरोधी के घर में जाने लगे नेता जी
हाल ही में ‘सरकार’ के घर सत्ताधारी दल के विधायकों की बैठक बुलाई गई। उस दौरान विरोधी दल के पुराने मुखिया के घर में उनकी पार्टी के विधायकों की डिनर पार्टी चल रही थी। इसी दौरान रूलिंग पार्टी के सबसे सीनियर विधायक की गाड़ी विरोधी दल के नेता के घर की ओर मुड़ने लगी। ये देख मीडिया के कैमरे नेताजी की ओर घूम गए। हालांकि, नेता जी ने ‘सरकार’ के घर का रास्ता पूछा और गाड़ी मोड़कर वहां से चले गए। इस घटनाक्रम को नेता जी की रणनीति से जोड़कर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। लेकिन बाद में पता चला कि सरकार के घर में जिस दरवाजे से आते-जाते थे, वो फिलहाल निर्माण कार्य के चलते बंद है। इस गफलत में वे विरोधी दल के नेता के द्वार तक जा पहुंचे। करप्शन कथा से विधायक जी नाराज
‘महाराज’ के इलाके में एक मंत्री को हराकर विधायक बने विरोधी दल के नेता का एक जनपद सीईओ से विवाद हो गया। विधायक जी का आरोप है कि सीईओ कलेक्टर के नाम से विधायक निधि के कामों में कमीशन मांगते हैं। वहीं, सीईओ ने कलेक्टर से शिकायत कर खुद की जान को खतरा बताया है। यही नहीं, विधायक जी पर गाली-गलौज करने का भी आरोप लगाया है। इधर, विधायक जी का तर्क है कि सरपंचों के जरिए उन्हें सीईओ की करप्शन कथा सुनने को मिली है। इस पर रोक लगाकर ही वे दम लेंगे। सोने-चांदी की ईंटों का मालिक कौन?
राजधानी में आयकर विभाग और लोकायुक्त की छापामारी हुई। जिन धनकुबेरों पर रेड की गई, उनके तार सूबे के मंत्रियों से जुडे़ बताए जा रहे हैं। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है, ये तो सरकार और उनके मंत्री जानें। लेकिन, अंदरखाने की खबर है कि सत्ताधारी दल के दो दिग्गजों में पावर वॉर के बीच हुई इस कार्रवाई के पीछे रूलिंग पार्टी के ही राजदार हैं। कार्रवाई के लिए कैश से लेकर सिल्वर और गोल्ड की लोकेशन राजदारों ने ही जांच एजेंसियों को मुहैया कराईं। अब उपद्रवी को अपनी औलाद बताए कौन? इसी तर्ज पर दिग्गज इन धनकुबेरों से पल्ला झाड़ रहे हैं। सुनी-सुनाई सीरीज की ये कड़ी भी पढ़ें… मंत्री-सांसद को मिलजुल कर काम करने की नसीहत राजनीति की रेस में आगे निकलने के लिए नेताओं में तगड़ा कॉम्पिटिशन रहता है। नेता चाहे अपने दल के हो या विरोधी दल के, उनके बीच शह-मात का खेल चलता रहता है। सूबे के एक मंत्री और सांसद के बीच भी कुछ ऐसा ही खेल चल रहा है। मामला राजधानी से लगे एक जिले का है। खबर यहां पढ़ें…


