भिंड जिले के गोरमी के कृपे के पुरा गांव में ग्वालियर के कालरा हॉस्पिटल द्वारा आयोजित निशुल्क नेत्र शिविर ने आठ लोगों के जीवन को अंधेरे में धकेल दिया। शिविर में मोतियाबिंद ऑपरेशन कराने वाले इन मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई। सभी मरीज ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) में भर्ती हैं, लेकिन दो दिन के उपचार के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ है। मरीजों के परिजनों ने दैनिक भास्कर से अपनी व्यथा साझा की। चपरा निवासी चिमेली बाई के बेटे मुकेश लोधी ने बताया कि उनकी मां ने 9 दिसंबर को कृपे के पुरा में आयोजित शिविर में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। ऑपरेशन के बाद उनकी आंखों से देखना बंद हो गया। 19 दिसंबर को उन्हें ग्वालियर के जेएएच में भर्ती कराया गया, लेकिन अब तक तीन जांचें हो चुकी हैं और डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि संक्रमण के कारण रोशनी लौटना मुश्किल है। संक्रमण रोकने की कोशिश भूरी बाई के बेटे जितेंद्र ने बताया कि ऑपरेशन के बाद उनकी मां की आंखों में भी संक्रमण हो गया। दो दिन से ग्वालियर में इलाज चल रहा है, लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि संक्रमण गहरा हो गया है, और रोशनी लौटने की संभावना बेहद कम है। अभी सिर्फ संक्रमण रोकने के लिए दवाएं दी जा रही है गौरतलब है कि निशुल्क नेत्र शिविर में लापरवाही के कारण यह बड़ी घटना हुई है। कालरा हॉस्पिटल द्वारा ग्वालियर में ऑपरेशन किए गए थे। शिविर में शामिल अन्य मरीज भी चिंतित हैं, जबकि प्रभावित मरीजों के परिवार अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। इस घटना ने निशुल्क स्वास्थ्य शिविरों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करनी होगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


