आज की महिलाएं अब प्रेग्नेंसी के दौरान भी खुद को फिट रखने के लिए वर्कआउट करना जरूरी मानने लगी हैं। खासकर प्रोफेशनल महिलाएं जो पहले से ही रूटीन में वर्कआउट कर रही होती हैं, वे प्रेग्नेंसी के सेकेंड ट्राइमेस्टर से ही डॉक्टर की सलाह के बाद दोबारा जिम या योगा शुरू कर देती हैं। बदलते नजरिए ने मां बनने की सोच को हेल्दी बनाया है। अब महिलाएं सिर्फ मां नहीं, फिट मां बनना चाहती हैं। सेलिब्रिटीज के प्रभाव ने इस ट्रेंड को और पॉपुलर कर दिया है। इस वजह से जिम में प्रेग्नेंट महिलाओं की संख्या पहले से कहीं ज्यादा बढ़ने लगी है। फिटनेस कोच मनकीरत कौर का कहना है कि ट्राइमेस्टर के हिसाब से एक्सरसाइज डिजाइन की जाती है जैसे सेकेंड ट्राइमेस्टर में वेट ट्रेनिंग और अंतिम महीनों में स्ट्रेचिंग। पोस्ट प्रेग्नेंसी में भी अब महिलाएं सालभर इंतजार नहीं करतीं। फिटनेस को लेकर जागरूक होना अच्छी बात है, लेकिन हर महिला के लिए एक जैसा वर्कआउट रूटीन सही नहीं होता। जरूरी है कि कोई भी वर्कआउट डॉक्टर की सहमति और एक्सपर्ट की निगरानी में ही किया जाए। दीप ब्रीदिंग और आर्म मूवमेंट्स जैसे एक्सरसाइज सेफ रहती है। लोअर बॉडी पर प्रेशर डालने से बचना चाहिए। पोस्ट प्रेग्नेंसी में खास ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर डिलीवरी सिजेरियन हुई है, तो तीन महीने तक वर्कआउट करने से बचना चाहिए। केस 1 : इमेज कंसल्टेंट ने प्रेग्नेंसी के 3 माह बाद शुरू किया जिम : 27 वर्षीय इमेज कंसल्टेंट की जिम रूटीन पहले से ही फिक्स थी। जब उन्हें प्रेग्नेंसी का पता चला, तो उन्होंने पहले ट्राइमेस्टर में ब्रेक लिया, लेकिन डॉक्टर से सहमति मिलते ही सेकेंड ट्राइमेस्टर से उन्होंने वर्कआउट दोबारा शुरू कर दिया। एक्टिव रहने से उन्हें थकान और बैकपेन जैसी समस्याएं नहीं हुईं और डिलीवरी भी स्मूद रही। केस 2 : पहले बच्चे में हुई दिक्कतें, दूसरे में फिटनेस से मिली राहत : 32 साल की बुटीक ऑनर को पहले बच्चे के समय काफी हेल्थ इश्यू झेलने पड़े, इसलिए जब दूसरी बार प्रेगनेंट हुईं तो पहले से ही डाइट और एक्सरसाइज का रूटीन बनवा लिया। उन्होंने योगा और वॉक के साथ-साथ हल्की स्ट्रेचिंग भी की। नतीजा यह रहा कि इस बार नॉर्मल डिलीवरी हुई और वह डिलीवरी के बाद भी जल्दी रिकवर कर पाईं। केस 3 : पहले से था वजन ज्यादा, डिलीवरी से पहले ही जागरूक हुईं : 30 साल की बेकरी ऑनर का वजन प्रेगनेंसी से पहले ही काफी ज्यादा था। उन्हें डॉक्टर ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि अगर वजन कंट्रोल नहीं किया गया तो डिलीवरी में दिक्कत आ सकती है। पहले तो परिवार वाले उनके वर्कआउट के खिलाफ थे, लेकिन काउंसलिंग के बाद सब सहमत हो गए। उन्होंने हेल्दी डाइट फॉलो की और वॉक, योगा से खुद को एक्टिव रखा।


