संगत ने मीठे जल, लस्सी, नींबू पानी, खीर, जलेबी समोसे व पकौड़े का लंगर लगाया

भीषण गर्मी और 37.8 डिग्री तापमान में अमर शहीद बाबा दीप सिंह जी के गुरुद्वारा साहिब में एक ऐसा अलौकिक दृश्य देखने को मिला जिसने हर आंख को नम कर दिया और हर दिल को वाहेगुरु की भक्ति में लीन कर दिया। दोपहर 2 बजे तपती सड़कों पर हजारों की संख्या में संगतें नंगे पांव बैठी थीं आंखें बंद, मन वाहेगुरु में लीन और जुबां पर था सिर्फ सिमरन। इस भव्य जप तप समागम की शुरुआत बीबी चरणजीत कौर ने श्री जपुजी साहिब के पाठ से की। इसके बाद संगती रूप में श्री चौपाई साहिब, श्री सुखमणि साहिब के पाठ हुए। गुरुद्वारा साहिब का दरबार हाल तो पहले ही संगत से भर गया था, लेकिन संगत इतनी बढ़ गई कि सड़कों, गलियों और पार्किंग एरिया तक लोग बैठकर सिमरन करते दिखे। सिमरनजीत सिंह दुगरी निवासी ने बताया कि वह पिछले 5 वर्षों से इस समागम में आ रहे हैं। पहले जहां 5-6 हजार संगत होती थी, अब लाखों की संख्या में संगत पहुंच रही है। बाबा दीप सिंह जी जिनकी मनोकामना पूरी कर रहे हैं, लोग उसी श्रद्धा से बार-बार आ रहे हैं। बीबी कुलविंदर कौर (फतेहगढ़ साहिब) ने बताया कि वे सुबह 9 बजे परिवार सहित गुरुद्वारा साहिब पहुंचती हैं और शाम 4 बजे तक समागम में भाग लेती हैं। जब डॉक्टर जवाब दे देते हैं, तब लोग यहां आकर अरदास करते हैं और चमत्कारिक रूप से ठीक हो जाते हैं। स्त्री सत्संग की महिलाओं ने पाठ की समाप्ति के बाद संगती रूप में भावपूर्ण शबद गायन किया। मेरा सतगुरु मेनू देई जावें ते मैं वंडी जावा, सतगुरु के चरणों में मिलते सुख सारे, माधो हम ऐसे तू ऐसा, ताती वाहो ना लग गई, परब्रह्म सरनाई इन शब्दों के साथ संगत की आंखें नम हो गईं और वातावरण पूरी तरह भक्ति से सराबोर हो गया। गर्मी से राहत देने के लिए संगत ने मीठे जल, लस्सी, नींबू पानी के लंगर लगाए। वहीं दूसरी ओर खीर, समोसे, पकौड़े, जलेबी का लंगर वितरित कर संगतों की सेवा की गई। समापन पर सभी संगत ने मिलकर अरदास की और गुरु ग्रंथ साहिब से हुक्मनामा प्राप्त किया। बोले सो निहाल.. सत श्री अकाल! के जयकारों से आसमान गूंज उठा। इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा साहिब की कमेटी के सदस्य सुरिंदर पाल सिंह बिंद्रा, हरप्रीत सिंह राजधानी, सुखविंदर सिंह सरना, नवप्रीत सिंह बिंद्रा, अमरजीत सिंह टिक्का ने सभी संगतों का आभार प्रकट किया और बताया कि अगले समय और बेहतर प्रबंध किए जाएंगे।

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