राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट 10वीं के स्टूडेंट्स को री-चेकिंग की सुविधा देने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, ये सुविधा केवल गणित के सब्जेक्ट के लिए होगी। बोर्ड ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया है। स्टूडेंट्स के रिस्पांस के बाद यह तय होगा कि इसे अगले सत्र में भी रखा जाए या नहीं। वहीं, दूसरे विषयों में भी री-चेकिंग लागू की जाए या नहीं, ये निर्णय भी इसी पायलट प्रोजेक्ट के रिजल्ट पर आधारित होगा। हालांकि, री-चेकिंग की सुविधा को लेकर कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं हुए हैं। केवल गणित को ही क्यों चुना गया? बोर्ड के सचिव कैलाश चन्द्र शर्मा ने बताया कि शिक्षा मंत्री के निर्देश पर ही बोर्ड ने री-चेकिंग की सुविधा को पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड परीक्षार्थियों को री-टोटलिंग की सुविधा पहले ही उपलब्ध करवाई जा रही हैं। फिलहाल गणित विषय में ही अंकों में परिवर्तन की संभावना होती है। इसलिए इसी विषय को री-चेकिंग में रखा गया हैं। री-टोटलिंग और री-चेकिंग में अंतर री-टोटलिंग: इसमें केवल परीक्षक द्वारा दिए गए नंबर कैलकुलेट किए जाते हैं। यदि कैलकुलेशन में कोई बदलाव होते हैं तो परीक्षक के अंक बढ़ाकर संबंधित विषय में उसका रिजल्ट बदलकर मार्कशीट जारी की जाती है। गलत कैलकुलेशन के लिए संबंधित परीक्षक पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। री-चेकिंग: इसमें स्टूडेंट की ओर से रिजल्ट पर आपत्ति जताने और आवेदन करने के बाद फिर से उसकी उत्तरपुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन (री-चेकिंग) करवाई जाएगी। इसमें यदि किसी प्रश्न के उत्तर में कम या अधिक अंक दिए गए हैं तो उसे घटाया और बढ़ाया जा संकेगा। उसके बाद उसके पूर्व जारी किए गए परीक्षा परिणाम को परिवर्तित कर नई अंकतालिका जारी की जाएगी। 10.16 लाख से अधिक को किया पंजीकृत बोर्ड परीक्षा में इस बार कुल 19 लाख 98 हजार 509 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन से किया था। इनमें से सेकंडरी की परीक्षा में 10 लाख 16 हजार 963 परीक्षार्थी थे। इनमें से कितने परीक्षा में शामिल हुए और कितने अनुपस्थित रहे इसकी जानकारी बोर्ड द्वारा परीक्षा परिणाम के बाद जारी की जाएगी। गौरतलब हैं कि बोर्ड की परीक्षाएं 6 मार्च से शुरू होकर 9 अप्रैल को खत्म हुई थी।


