रणथंभौर में जहां 7 साल के बच्चे को बाघिन ने मारा, वह पहले भी हमला कर चुकी है। यहां 3 किलोमीटर में 14 बाघ-बाघिन का मूवमेंट है। खतरे के बीच श्रद्धालु गुजरते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि यह दूसरी बार है, जब त्रिनेत्र मंदिर के रास्ते में टाइगर के हमले में मौत हुई हो। रणथंभौर में बाघ-बाघिन के हमले को लेकर भास्कर रिपोर्टर ने वन विभाग और एक्सपर्ट से बातचीत की।पढ़िए- हमले को लेकर एक्सपर्ट ने क्या राय दी। पहले जानिए हुआ क्या था?
रणथंभौर में कार्तिक सुमन (7) पुत्र द्वारका माली निवासी गोहटा थाना देई खेड़ा (बूंदी) को बाघिन ने मार डाला था। बच्चा अपनी दादी के साथ त्रिनेत्र गणेश के दर्शन कर लौट रहा था। इस दौरान अचानक जंगल से एक बाघिन आई और बच्चे को मुंह में दबोचकर ले गई थी। बाघिन जंगल में काफी देर तक बच्चे की गर्दन पर पंजा रखकर बैठा रही थी। बाघिन टी-84 के फिमेल शावक ने किया था हमला
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कार्तिक सुमन पर टी-84 के फिमेल शावक ने हमला किया था। 4 से 5 महीने पहले यह शावक रणथंभौर दुर्ग में एक पर्यटक पर हमला कर चुका है। नाम नहीं लगाने की शर्त पर वन अधिकारी ने बताया कि शावक ने कार्तिक पर केवल हमला किया था। उसने बच्चे को खाया नहीं था। ऐसा दूसरी बार है कि त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग में किसी बाघ ने हमला किया है। वन्यजीव विशेषज्ञों यादवेंद्र सिंह के अनुसार लोगों को इस मार्ग पर पैदल नहीं जाना चाहिए या फिर समूह में (एक साथ) जाना चाहिए। क्योंकि बाघ समूह में हमला नहीं करता है। बढ़ानी होगी मॉनिटरिंग
पथिक लोक सेवा समिति के सचिव और वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट मुकेश सीट ने बताया कि गणेश धाम से रणथंभौर दुर्ग तक करीब ढाई से तीन किलोमीटर की सड़क को त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग के नाम से जाना जाता है। जिससे पैदल यात्री, बाइक सवार और कार सवार त्रिनेत्र गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं। यह पूरा इलाका CTH ( क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट) में आता है। आने वाले समय में वन विभाग की ओर से ट्रेकिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत नहीं किया गया तो इस तरह के हमले होंगे। त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर 14 टाइगरों का मूवमेंट
त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग इलाके में 14 बाघ-बाघिन और शावकों का मूवमेंट है। यहां बाघिन T-84 ऐरोहेड और उसके तीन शावक, बाघिन T-124 रिद्धि, उसके तीन शावक, बाघिन टी T-107 सुल्ताना और उसके तीन शावक, बाघ टी T-120, बाघिन T-39 नूर का मूवमेंट है। ऐसे में खतरा बराबर बना हुआ है। घने जंगल में शिफ्ट करने की जरूरत
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. धर्मेंद्र खांडल ने कहा कि हमले को लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि जिस शावक ने हमला किया उसकी उम्र 23-24 महीने है। कोई कयास लगाया जाना उचित नहीं है। लोगों का कहना है कि पहले भी उसने कैटल गार्ड पर हमला किया है, ये दूसरी बार है, जब बच्चे पर हमला हुआ है। उसकी निगरानी करने की जरूरत है, यदि उसमें कोई सुधार नहीं देखते हैं तो यहां से किसी घने जंगल में शिफ्ट करने की जरूरत है। LAC में लोकल ट्रॉम चलाने पर सहमति बनी थी
रणथंभौर नेचर गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष यादवेंद्र सिंह का कहना है कि साल 2019 में लोकल एडवाइजरी कमेटी ( LAC) में लोकल शटल(छोटी ट्रेन) चलाने की सहमति बनी थी। जिसका तत्कालीन विधायक दानिश अबरार ने भी समर्थन किया था। हालांकि उच्च स्तर पर इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया था। LAC में साल 2021 में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग को पैदल यात्री गणेश मंदिर तक नहीं भेजे जाए पर फैसला हुआ। ………………………………………… टाइगर के हमले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सवाई माधोपुर के रणथंभौर में एक टाइगर ने 7 साल के बच्चे को मार डाला। बच्चा की अपनी दादी के साथ त्रिनेत्र गणेश के दर्शन कर लौट रहा था। इस दौरान अचानक जंगल से एक टाइगर आया और बच्चे को मुंह में दबोचकर ले गया। टाइगर जंगल में काफी देर तक बच्चे की गर्दन पर पंजा रखकर बैठा रहा। पढ़ें पूरी खबर…


