भास्कर न्यूज| चाईबासा युवा पीढ़ी के लिए आदि संस्कृति कार्यशाला शनिवार को बिरसा जोहार उंबुल भवन चाईबासा में आयोजित की गई। इस कार्यशाला के तहत युवाओं को बदलते संस्कृति के स्वरूप की पहचान कराना है और गहराई से पारंपरिक दस्तूर से युवाओं को रूबरू कराना है। हीरामनी देवगम ने कहा कि हमारे समाज में अभी युवा और बुजुर्गों के बीच में संवाद नहीं होने के कारण वे लोग संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। युवाओं के बीच में ऐसा कार्यशाला आयोजित किया जाना चाहिए। ताकि युवा अपने संस्कृति और दस्तूर के बारे में जागरूक हों। बैठक में प्रकाश पुरती ने बताया कि हमें अपने बच्चों को स्कूल, कॉलेज, ट्यूशन और एग्जाम का कारण बताकर अपने पर त्योहारों में शामिल नहीं करते हैं, जिसके कारण बच्चे दस्तूर से वंचित हो रहे हैं। इसी संस्कृति को बचाने के लिए युवाओं के बीच अध्ययन व प्रशिक्षण जरूरी है। जगन्नाथ हेस्सा ने सुझाव दिया कि हम लोग दस्तूरों में शादी जन्म मरण के बारे में बताएंगे और हमारे दस्तूरों के पीछे की कहानी को भी एक दूसरे से शेयर करने की कोशिश करेंगे। इस बैठक में सर्वसहमति से अगली बैठक 24 अप्रैल पोटो हो मैदान में समय 3:00 बजे शाम को रखने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में मुख्य रूप से देशाउली फाउंडेशन से साधु हो, सामाजिक कार्यकर्ता रियांश सामड, संतोषी कुदादा, राखी गोप, शुरू देवगम और वसिल प्रेम हेम्ब्रम, नारायण कंडेयांग व सुशीला बोदरा आदि मौजूद थे।


