भास्कर न्यूज | राजनांदगांव जिले के सरकारी स्कूलों में गणित के विद्यार्थियों की संख्या तेजी से घट रही है। इसकी वजह गणित विषय के अध्यापन में शिक्षकों की कोताही सामने आई है। संकायों में सही ढंग से पढ़ाई नहीं होने की वजह से विद्यार्थियों के अंक कम आ रहा। जिसका असर उनके ओवरऑल रिजल्ट पर पड़ रहा है। यही वजह है कि अब सरकारी स्कूलों में गणित संकाय में स्टूडेंट्स एडमिशन लेने से बचने लगे हैं। यह शिक्षा विभाग के लिए भी चिंतनीय विषय है। अब डीईओ प्रवास सिंह बघेल ने स्कूलों में गणित के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और शिक्षण कार्य में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर विशेष निगरानी की तैयार की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गणित विषय के अध्यापन को लेकर स्कूलों में गंभीरता नहीं दिखाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई भी तय की जाएगी। वहीं पहली प्राथमिकता स्टूडेंट्स को गणित विषय के महत्व को समझाना और संकायों में एडमिशन बढ़ाना होगा। बता दें कि खासकर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में गणित के शिक्षकों की कमी है। वहीं जहां शिक्षक है, उन पर कई कक्षाओं का दबाव है। इसके चलते शिक्षक भी पर्याप्त ढंग से कक्षाओं में विद्यार्थियों के पीछे मेहनत नहीं कर पा रहे हैं। ज्यादातर स्कूलों में गणित की पढ़ाई सालभर औपचारिक हो रही है। इसकी वजह से वार्षिक परीक्षा में स्टूडेंट्स के अंक कम आ रहे हैं। गांवों में कोचिंग नहीं रुचि बढ़ाने प्रयास नहीं शिक्षा विभाग की ओर से गणित की पढ़ाई में रुचि बढा़ने कोई खास प्रयास नहीं किया जाता। इसकी वजह से भी स्टूडेंट्स इसके महत्व को नहीं समझते। यही वजह है कि विद्यार्थी गणित की बजाए दूसरे संकाय में दाखिला रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में क्लासरूम के अतिरिक्त गणित के लिए अतिरिक्त कोचिंग सुविधा नहीं होने की वजह से भी विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिसकी वजह से ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या स्कूलों में घटित जा रही है। ऐसे कुछ तथ्य सामने आए हैं, जिसकी वजह से स्टूडेंट्स गणित की पढ़ाई से बचने लगे हैं।


