अधिकांश जगह बस शेल्टरों के बुरे हाल, कहीं कुर्सियां गायब तो कहीं पार्किंग बनी, 6 रूटों पर चलने वाले 12 हजार यात्री परेशान

गांधी ग्राउंड : गांधी ग्राउंड के बाहर बस स्टॉप बना है। आसपास कई दुकानें हैं। लोग अपना वाहन बस स्टॉप के चारों तरफ ही पार्क करते हैं। प्राइवेट बस ऑपरेटर भी सवारियों को बैठाने के लिए यहीं अपनी बस लंबे समय तक खड़ी रखते हैं। ऑटो चालक सवारी बैठाने के लिए इस शेल्टर के आसपास पार्किंग रखते हैं। ठेले संचालक भी बस स्टॉप की छांव लेने के लिए आसपास में अपना ठेला लगाते हैं। ऐसे में कई बार सिटी बस यहां रुकने के बजाय आगे-पीछे रुकती है। आर 1 – बलीचा से बड़गांव, आर 2 – तीतरड़ी से बड़गांव, आर 3 – रामपुरा से डबोक, आर 4 – बलीचा से अंबेरी, आर 5- चुंगीनाका से तीतरड़ी, आर 6 – एयरपोर्ट से चेतक सर्किल (2 एसी बस हैं) सिटी रिपोर्टर | उदयपुर नगर निगम और स्मार्ट सिटी की ओर से शहर में लोगों की सुविधा के लिए बस क्यू शेल्टर (बस स्टॉप) बनाए गए हैं, लेकिन अधिकांश जगह ये शेल्टर या ​तो अवैध पार्किंग, अतिक्रमण का शिकार हैं या कई जगह जर्जर अवस्था में हैं। कई शेल्टर में कुर्सियां तक नहीं है। इन पर लगी डिजिटल स्क्रीन बंद पड़ी है। कुछ शेल्टर में तो रात के समय बेघर लोगों का जमावड़ा रहता है। वे इनके नीचे अपनी रात गुजारते हैं। इस तरह के हालात तब हैं, जबकि शहर में 24 सिटी बसें चलती हैं। इनमें 2 एसी बस हैं, जबकि अन्य सभी नॉन एसी साधारण बस हैं। ये 6 रूटों पर संचालित हैं। इनमें रोज 12-13 हजार यात्री सफर करते हैं। बता दें कि ये शेल्टर यात्रियों की सुविधा के लिए लगाए गए थे। इनके नीचे बैठने और खड़े होकर बसों का इंतजार करने की सुविधा है। इसके जरिये यात्रियों का धूप और बारिश से भी बचाव होता है। भास्कर ने शहर में प्रमुख जगहों पर लगे बस क्यू शेल्टर की पड़ताल की, उन पर ऐसे हालात मिले… उदयपुर। गर्मी तेज होने के साथ ही शहर में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। कई इलाकों में नल तीन से चार दिन के अंतराल में दिए जा रहे हैं। जहां नल की सुविधा नहीं है, वहां लोग टैंकर मंगवाकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। इसके बावजूद कई लोग पानी की अहमियत को नहीं समझ पा रहे हैं। कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है कि जिस दिन नल आते हैं, उस दिन सड़कों पर पानी व्यर्थ बहता रहता है। लोग रैंप के साथ घर के बाहर का जो एरिया, झाड़ू या पोछे से साफ हो सकता है, उसे भी पानी डालकर धोते हैं। इसके साथ ही हर दूसरे या तीसरे दिन अपनी कार-बाइक धोने के लिए भी सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं। जिन घरों में ट्यूबवेल लगे हैं, उनमें से कई घरों में भी पानी का असीमित उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में क्षेत्र का ग्राउंड वाटर लेवल काफी नीचे चला जाता है। जिससे दूसरे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई शहरों में तो घरेलू पानी से गाड़ियों की धुलाई करने पर जुर्माना लगाने तक का प्रावधान है। इस समस्या से निपटने के लिए हमें पानी का जिम्मेदारी और सीमित उपयोग करना होगा। जलदाय विभाग को भी जगह-जगह लीकेज होती लाइनों से होने वाली पानी की बर्बादी रोकनी होगी। सिटी रेलवे स्टेशन : सिटी रेलवे स्टेशन के एक नंबर मुख्य एंट्री के बाहर बस स्टॉप बना हुआ है। इसकी जर्जर हालत को देखकर लगता है कि यहां कई महीनों से कोई नहीं आया है। लोहे की कुर्सियां गायब हो चुकी हैं। ऑटो चालक यहां अवैध पार्किग करते हैं। कबाड़ वाहन भी यहीं खड़े रहते हैं। इस कारण बसें यहां रुकती ही नहीं हैं। ट्रेन से आने वाले यात्री मजबूरी में ऑटो में आते-जाते हैं।

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