भास्कर न्यूज | संगम कोयलीबेड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सितराम के आश्रित गांव राजा मुंडा में सरकारी योजनाओं की हकीकत साफ दिखाई देती है। यहां 1984-85 में आंगनबाड़ी केंद्र की शुरुआत हुई थी, लेकिन आज तक उसके लिए भवन तक नहीं बन पाया है। नतीजतन चार दशकों से यह केंद्र एक चर्च भवन में संचालित हो रहा है। इस अस्थायी व्यवस्था में बच्चों को न तो पर्याप्त सुविधा मिल पा रही है न ही उनका पोषण और स्वास्थ्य सुनिश्चित हो रहा है। गांव में संचालित इस आंगनबाड़ी केंद्र में 22 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से बच्चे आंगनबाड़ी नहीं आ रहे हैं। वजह है केंद्र में गर्म भोजन न पहुंचना है। सहायिका ने बताया अप्रैल का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक केंद्र को खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एलिना कुजुर ने बताया उन्हें गर्म भोजन की सामग्री तीन दिन पहले स्व-सहायता समूह के द्वारा छोटेबेटियां में दिया था, लेकिन बेटी की शादी की तैयारियों में व्यस्त होने के चलते वह उसे केंद्र तक नहीं पहुंचा पाईं। खाद्य सामग्री वितरण का कार्य छोटे बेटियां के स्व-सहायता समूहों के माध्यम से दिया जाता है, लेकिन समय पर सामग्री उपलब्ध न होने के कारण बच्चों की उपस्थिति प्रभावित हो रही है। अभिभावक भी बच्चों को भेजने में रुचि नहीं दिखा रहे, क्योंकि गर्म भोजन मिल रहा है। कार्रवाई नहीं कर केवल आश्वासन दिया जाता है कोयलीबेड़ा ब्लॉक में इस तरह के मामले बार-बार सामने आते हैं, लेकिन विभागीय कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यकर्ताओं की लापरवाही हो या स्व-सहायता समूह की अनदेखी जिम्मेदारों पर कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं होती। परियोजना अधिकारी प्रभारी सीमा सिंह ने कहा अभी वे छुट्टी पर हैं। वापस लौटने के बाद मामले को देखेंगे।


