भास्कर न्यूज| खरौद भगवान लक्ष्मणेश्वर महादेव की नगरी खरौद में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 134वीं जयंती मनाई गई। आयोजन शासकीय बालक छात्रावास में हुआ, जिसमें नगर के नागरिक, अधिकारी, बुद्धिजीवी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में शामिल हुए। मुख्य अतिथि शासकीय लक्ष्मणेश्वर महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. जीसी भारद्वाज रहे। विशिष्ट अतिथि सुबोध शुक्ला और कार्यक्रम अध्यक्ष पूर्व प्राचार्य बीएल भारद्वाज उपस्थित थे। दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया। फिर बौद्धिक सत्र शुरू हुआ। कमलेश यादव ने डॉ. आंबेडकर की बौद्धिक क्षमता पर प्रकाश डाला। एसआर महर्षि ने उनके बंधुत्व और सामाजिक एकता के विचारों को आज के समाज के लिए जरूरी बताया। चैतराम भारद्वाज ने भाईचारे पर आधारित कविता सुनाई। राकेश भारद्वाज और संजय साहू ने भावपूर्ण कविताओं से माहौल को ओजपूर्ण बना दिया। सुबोध शुक्ला ने कहा कि डॉ. आंबेडकर सिर्फ संविधान निर्माता नहीं थे, वे सामाजिक पुनरुत्थान के महान शिल्पी थे। उन्होंने बताया कि संविधान बनाते समय बाबा साहेब ने कई देशों के संविधान का अध्ययन किया और भारत की परिस्थितियों के अनुसार लचीला तथा जनकल्याणकारी संविधान तैयार किया। कार्यक्रम में बीएल भारद्वाज ने कहा कि बाबा साहेब ने सामाजिक समता, न्याय, समानता और बंधुत्व के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उनके विचार आज भी उतने ही जरूरी हैं, जितने आजादी के बाद थे। डॉ. जीसी भारद्वाज ने कहा कि डॉ. आंबेडकर को सिर्फ दलितों तक सीमित करना उनके व्यक्तित्व को छोटा करना होगा। उन्होंने रिजर्व बैंक की स्थापना, महिला सशक्तिकरण, कर्मचारी बीमा योजना और संविधान निर्माण में उनके योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों को जीवित रखने का एकमात्र तरीका उनके विचारों को जीवित रखना है। कार्यक्रम का समापन छात्रावास अधीक्षक ओम प्रकाश साहू के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। आयोजन को सफल बनाने में चैतराम भारद्वाज, अश्वनी भारद्वाज और बाला राम भारद्वाज का विशेष योगदान रहा। पुष्पमणी बंजारे, गोविंद घृतलहरे, गीता, रमेश भारद्वाज, अमरिका, कुसुमलता और रुक्मणी भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


