किन्नर समुदाय की संवेदनाओं को जीवंत करता नाटक ‘रंगीली भागमती’:रवीन्द्र मंच पर पर दर्शकों ने हंसी और आंसुओं के साथ किया नाटक का स्वागत, अशोक राही ने किया निर्देशन

रविवार की शाम जयपुर के रविंद्र मंच पर एक अलग ही रंग देखने को मिला, जब सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर करारा व्यंग्य करता नाटक ‘रंगीली भागमती’ मंचित हुआ। पीपुल्स मीडिया थिएटर के बैनर तले प्रस्तुत इस नाटक को लेखक व निर्देशक अशोक राही ने रचा और निर्देशित किया। इस नाटक ने दर्शकों को न केवल हंसाया, बल्कि कई बार भावुक कर रुला भी दिया। नाटक की कहानी का केंद्र किन्नर समुदाय है, जो समाज का हिस्सा होने के बावजूद मुख्यधारा से वंचित रहा है। भागमती, हीरा, श्रीदेवी, रूबी, शब्बो और चांद जैसे किरदारों के माध्यम से अशोक राही ने न केवल इस समुदाय की संवेदनाओं, संघर्षों और व्यथाओं को दर्शाया, बल्कि यह भी दिखाया कि किस तरह वे सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था की उपेक्षा का शिकार होते हैं। नाटक की सबसे अनोखी विशेषता इसका नाट्य शिल्प रहा, जो जर्मन नाटककार ब्रेख्त की एलिमिनेशन थ्योरी पर आधारित था। एक ही दृश्य को तीन अलग-अलग दृष्टिकोणों से मंचित होते देख दर्शक रोमांचित हो उठे। यह प्रयोग दर्शकों को सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं बनाता, बल्कि सोचने पर मजबूर भी करता है। नाटक का एक खास हिस्सा रहा किन्नर किरदारों का कैटवॉक और फैशन शो, जिसने दर्शकों को चकित कर दिया। रंगीन परिधानों में सजे कलाकारों ने फैशन स्टाइल और आत्मविश्वास के साथ ऐसा प्रदर्शन किया कि दर्शक वाहवाही करते नहीं थके। करीब दो दर्जन कलाकारों ने इस नाटक में अभिनय किया, जिनमें नितिन सैनी, अतुल गुप्ता, अक्षत शर्मा, शुभम गौतम, रूद्र खत्री, जितेंद्र, जय सोनी, राम, राहुल चौधरी, मुस्कान, जतिन पारीक, तुषार, शालिनी शर्मा, हिना, घनश्याम, पवन, शिवम सोनी, चिराग, हरप्रीत, कुणाल प्रमुख थे। गीतकार कवि राघवेंद्र रावत थे और इसका संगीत अनिल सक्सेना और चंद्रकांत राजूरकर ने दिया, प्रकाश संयोजन शहजुर अली ने किया, जबकि रूप सज्जा में रवि बांका का योगदान रहा।नितिन सैनी सह-निर्देशक की भूमिका में थे। आयोजन के संयोजक रघुवीर पूनिया ने सभी दर्शकों का स्वागत किया और नाट्य संध्या का संयोजन सुप्रिया शर्मा ने किया।

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