चित्तौड़गढ़ में भीषण गर्मी दिखा रही असर, तापमान 42 पार:प्रदेश में दूसरा सबसे गर्म जिला रहा, चिलचिलाती धूप से हाल बेहाल

चित्तौड़गढ़ में गर्मी तेज होती जा रही है। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 42.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पूरे राजस्थान में कोटा के बाद दूसरा सबसे ज्यादा रहा। इसके साथ ही न्यूनतम तापमान भी सोमवार के मुकाबले घटकर 20.5 डिग्री रह गया। सोमवार को अधिकतम तापमान 41.2 और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस था। तापमान में बढ़ोतरी के साथ गर्म हवाओं और लू के आसार बढ़ते जा रहे हैं। सुबह से ही तेज धूप का असर
बुधवार को सुबह से ही सूरज ने तीखे तेवर दिखाए। सुबह 8 बजे से ही गर्मी का असर महसूस होने लगा और चिलचिलाती धूप ने लोगों को घरों में रहने पर मजबूर कर दिया। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में मौसम के शुष्क रहने और तापमान में और बढ़ोतरी की संभावना जताई है। यदि यही स्थिति बनी रही तो तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है, जिससे लू चलने का खतरा भी बढ़ जाएगा। मौसम विभाग ने जारी किया हीटवेव अलर्ट
मौसम विभाग ने भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए चित्तौड़गढ़ सहित कई जिलों में हीटवेव अलर्ट जारी किया है। इसके तहत लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पानी का ज्यादा सेवन करने और गर्मी से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। श्रमिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम
हीटवेव अलर्ट के बाद उप श्रम आयुक्त कुलदीप सिंह ने जिले की सभी फैक्ट्रियों, दुकानों और निर्माण स्थलों को जरूरी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादा गर्मी और लू से मजदूरों को बचाना बहुत जरूरी है। इसके लिए हर जगह ठंडा पानी, छाया, प्राथमिक इलाज, ओआरएस घोल, ग्लूकोज, आराम करने की जगह और साफ़ शौचालय जैसी सुविधाएं देना जरूरी है। बीमार पड़ने पर तुरंत इलाज हो
अगर किसी मजदूर की तबीयत काम करते समय खराब हो जाए तो उसे तुरंत नज़दीकी हॉस्पिटल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाना होगा। ये जिम्मेदारी मालिक की होगी। अगर इस मामले में कोई लापरवाही होती है तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है। दिहाड़ी मजदूरों की मजदूरी नहीं कटेगी
जो मजदूर रोज़ के हिसाब से काम करते हैं (पीस रेट पर), अगर गर्मी की वजह से कुछ समय काम नहीं कर पाते तो उनकी मजदूरी नहीं काटी जानी चाहिए। मालिकों से कहा गया है कि वे इंसानियत से काम लें और मजदूरों के साथ सहानुभूति रखें। निर्माण स्थलों पर अलग इंतजाम
निर्माण स्थलों पर काम कर रहे मजदूरों के लिए खासतौर पर छाया, ठंडा पानी, आराम करने की जगह और बर्फ के पैकेट जैसी चीज़ें उपलब्ध कराना जरूरी है। इससे उन्हें लू से राहत मिलेगी और उनकी तबीयत भी ठीक रहेगी।

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