यूपीएससी में किसी को एक अटैम्प्ट में ही सफलता मिल जाती है तो किसी को अच्छी रैंक लाने में 3-4 अटैम्प्ट लग जाते हैं। वर्ष 2000 से 2024 तक के 25 साल के आंकड़े बताते हैं कि पहली रैंक लाने वाले अधिकांश उम्मीदवारों के 2-3 अटैम्प्ट लगते हैं। यूपीएससी टॉपर ज्यादातर 3 अटैम्प्ट वाले बनते हैं। 25 साल में 8 टॉपर्स ने ऐसा किया है। वहीं, कुल 13 टॉपर्स ने 2-3 अटैम्प्ट में रैंक-1 हासिल की। ट्रेंड बताता है कि 72% टॉपर्स को रैंक-1 लाने के लिए 2-4 साल का समय लगा। साथ ही 5 टॉपर्स ऐसे थे जिन्होंने एक ही अटैम्प्ट में सफलता हासिल की। एकेडमिक बैकग्राउंड की बात करें तो पिछले पांच साल के टॉप-3 का एनालिसिस बताता है कि सबसे ज्यादा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स ने इस दौरान टॉप-3 में स्थान बनाया। इनमें 8 टॉपर्स ने तो बीटेक किया था। यानी पिछले पांच साल में कम से कम एक बीटेक स्टूडेंट ने टॉप-3 में जगह बनाई है। एक खास बात यह भी है कि ज्यादातर टॉपर्स ने सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया हुआ था। ह्यूमैनिटीज से ग्रेजुएशन करने वाले भी चार टॉपर्स बने हैं। इसके बाद बीकॉम और इकोनॉमिक्स ग्रेजुएट्स शामिल हैं। पांच साल में 73 फीसदी बेटियों ने टॉप किया यूपीएससी में लड़कियों का सक्सेस रेट अधिक है। पिछले पांच साल के यूपीएससी टॉपर्स में 73% लड़कियां रही हैं। हर साल कम से कम एक लड़की ने टॉप-3 में जगह बनाई है। वहीं, सबसे अधिक रैंक वन टॉपर्स देने में उत्तर प्रदेश आगे है। पिछले 25 साल में रैंक-1 लाने वालों में पांच यूपी के थे। इसके बाद हरियाणा से तीन और राजस्थान से दो टॉपर बने। इसके अलावा पिछले 25 साल में ऑप्शनल सब्जेक्ट का भी एक रोचक ट्रेंड सामने आया। ज्यादातर रैंक-1 टॉपर्स ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और पॉलिटिकल साइंस को ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में चुना।


