श्रीमद् भागवत कथा में पूतना वध, कंस वध और गोपियों की लीला का अहम स्थान है। पूतना वध प्रसंग का जिक्र करते हुए श्रीमद् भागवत कथा वाचक गया के पीठाधीश्वर वेंकटेश प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि कंस की दासी राक्षसी पूतना को भगवान कृष्ण ने मार डाला। पूतना ने कंस के आदेश पर नवजात श्री कृष्ण को मारने के लिए विषयुक्त दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन श्री कृष्ण ने उसके स्तनपान कर प्राण हर लिए और पूतना को मुक्त कर दिया। कथावाचक ने कहा कि कंस के इशारे पर पूतना मायावी रूप धारण कर बाल रूप कृष्ण भगवान को दूध पिलाने के बहाने उनका वध करने के लिए नंद बाबा के घर पहुंची और दूध पिलाने लगी, तभी भगवान श्री कृष्णा अंतर्यामी समझ गए कि यह कोई साधारण महिला नहीं है यह तो राक्षस पूतना है जो जहर रूपी स्तनपान करने के लिए आई है। जब बाल रूप गोविंद ने स्तनपान करने लगे तो पूतना के शरीर में धीरे-धीरे कंपन बढ़ता गया और वह मृत्यु को प्राप्त हो गई। पूरे गोकुलवासी इस दृश्य को देखकर अचंभित रह गए।
श्री कृष्ण की मथुरा यात्रा कंस के साथ उनका टकराव और अंतत उनकी विजय प्रत्येक आध्यात्मिक जनता के लिए बहुत बड़ी सीख है। कंस को मारने के लिए श्री कृष्ण की निडर यात्रा किस प्रकार साहस करुणा और बुराई पर अच्छाई की अंतिम जीत के शाश्वत सबक प्रस्तुत करती है। यह कथा केवल वीरता का रोमांचकारी वर्णन नहीं है, यह अत्याचार पर धर्म की जीत और अहंकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। मथुरा के निर्दय कंस राजा के लिए भगवान ने भविष्यवाणी की थी कि उसकी मृत्यु उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान के हाथों होगी। गोपियों के साथ भगवान कृष्ण की लीला का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गोपियां श्री कृष्ण से मिलने विभिन्न बहाने से आती थीं, ताकि उनके साथ समय बिता सके। अमर कुंज के दुर्गा मंदिर परिसर में माता शीतला की प्रतिमा की स्थापना के लिए भव्य कलश यात्रा निकाली गई। शीतला माता की प्रतिमा के साथ मां दुर्गा की नौ रूपों की भी प्रतिमाएं स्थापित की जाएगी। प्रतिमाओं को भी कलश यात्रा में शामिल कर नगर भ्रमण कराया गया। इधर, मंदिर प्रांगण में सात दिवसीय श्री यज्ञा बाबा मूर्ति अनावरण देव प्रतिष्ठा महायज्ञ के अनुष्ठान भी जारी रहे। गुरुवार को आचार्य पंडित श्याम सुंदर भारद्वाज ने महायज्ञ के धार्मिक अनुष्ठान करवाए। शुक्रवार को महाभंडारा होगा। भगवान की प्रतिमाओं का नगर भ्रमण कराया।


