पत्नी से सस्पेंशन की बात छिपाई थी, उसे पता चल ही गया; रात को खाना नहीं खाया, सुबह दम तोड़ा

पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कर्मचारी अमरीक सिंह ने अपने सस्पेंशन की खबर प|ी बलवीर कौर से छुपाई थी। लेकिन बुधवार को कनाडा में रह रही बेटियों के जरिए उन्हें पति के सस्पेंशन की खबर मिल गई। इसके बाद बलवीर कौर ने खाना छोड़ दिया और बार-बार कहती रहीं ‘मेरे सिर पर हाथ रखकर बोलो सब ठीक हो जाएगा’। अमरीक सिंह उन्हें दिलासा देते रहे। वीरवार की सुबह 5.30 बजे बलवीर कौर सोकर उठी थीं। वॉशरूम के बाद वह बेड पर दोबारा पहुंची तो उनकी हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पीएयू प्रशासन ने निलंबित अमरीक सिंह को बहाल कर दिया। गौर हो कि पीएयू में जूनियर लैब असिस्टेंट के पद पर कार्यरत अमरीक सिंह ने 27 मार्च को पार्किंग में मौजूद आप नेता परमवीर सिंह को टोका था। आप नेता परमवीर सिंह ने थाने में शिकायत के साथ ही अमरीक सिंह को सस्पेंड करा दिया। इसे लेकर पीएयू कर्मचारी यूनियन ने विरोध कर रैली निकाली थी। सिस्टम किसके लिए:जो आप नेता कहता गया, सिस्टम वह करता गया लुधियाना। अमरीक की प|ी की मौत के लिए कहीं न कहीं सिस्टम भी जिम्मेदार है। आप नेता को बचाने के लिए पुलिस, प्रशासन और पीएयू प्रशासन एक हो गया जबकि माफी मांगने के बाद भी अमरीक को सस्पेंड कर सत्ता की ताकत का अहसास कराया गया। पीएयू यूनियन ने इसका विरोध करने की कोशिश की जिन्हें डिटेन कर आवाज बुलंद करने से रोका गया। 27 मार्च को यह घटनाक्रम हुआ था। इसके बाद आप नेता ने अमरीक को अंजाम भुगतने की धमकी देकर थाने में शिकायत कर दी। पुलिस ने आप नेता के कहने पर अमरीक सिंह को थाने में बुलाकर माफी तक मंगवाई। लगा था कि मामला शांत हो जाएगा लेकिन आप नेता के सरकार में पैठ होने के कारण अमरीक को सस्पेंड तक करा दिया। आरोप हैं कि प्रशासन और पीएयू प्रशासन तक ने इसमें पूरा सहयोग किया। अमरीक के निलंबन का आधार कागजों में बीएलओ ड्यूटी में लापरवाही दर्शाया गया लेकिन यह दावा किया जा रहा है कि अमरीक की पिछले 10 सालों से चुनाव संबंधित ड्यूटी लगती रही है और वे हमेशा ड्यूटी करने पहुंचते थे। लेकिन, रिटायरमेंट से पहले सस्पेंशन में बीएलओ ड्यूटी का आधार बनाने से कई सवाल भी उठ रहे हैं। जब पीएयू यूनियन ने विरोध किया तो पीछे की कहानी निकलकर आई कि आप नेता से विवाद के कारण ही सस्पेंड किया गया। पत्नी की आंखें दान की: अमरीक की प|ी बलवीर कौर हमेशा दूसरों की मदद करने में विश्वास रखती थीं। उनके देहांत के बाद, अमरीक ने उनकी आंखें दान कर दीं। उन्होंने कहा कि वो चाहती थीं कि उनका जाना भी किसी के काम आए। अब उनकी आंखों से कोई और देख सकेगा, ​शायद उन्हीं सपनों को जिन्हें उन्होंने कभी जिया था। ये तस्वीर अमरीक की मां अमरजीत कौर की हैं। रो-रोकर बुरा हाल है। मेरी प|ी के सारे अरमान अधूरे रह गए बेटे की रिटायरमेंट का इंतजार था, बहू का संस्कार देखना पड़ेगा… ये आंखें इंसाफ मांग रहीं सस्पेंशन के ऑर्डर के साथ घुटघुटकर जी रहे… संबंधित खबर पढ़ें पेज 6 पर कल होगा अंतिम संस्कार: अमरीक सिंह की दोनों बेटियां सिमरनदीप कौर (27) और नवदीप कौर (26) को पिता की सस्पेंशन की खबर वीडियो के जरिए बुधवार को मिली। उन्होंने मां से बात की और पिता के सस्पेंशन के बारे में बताया। अगले दिन मां की मौत हो गई। रिश्तेदारों की मदद से एमरजेंसी फ्लाइट करवाई गई। दोनों आज शाम तक भारत पहुंचेंगी। 26 अप्रैल को उनकी मां का अंतिम संस्कार होगा। मेरा बेटा क्या करेगा अब वो तो अकेला रह गया। तू क्यों चली गई बहू, भगवान मुझे क्यों नहीं उठा लेता, मेरी पिंकी को कौन सा दुख ले गया? ये चीखती-बिलखती आवाज है अमरीक सिंह की मां की, जो थोड़ी-थोड़ी देर में बहू को याद कर जोर-जोर से रोने लगती थीं। वो बार-बार दरवाज़े की ओर देखती, जैसे उम्मीद हो कि पिंकी लौट आएगी। इतनी जल्दी कौन सा दुख उसे ले गया? सब कुछ तो बस शुरू होने वाला था। घर मे खुशियां आने वाली थीं, रिटायरमेंट, शादी लेकिन सब सपने अधूरे छोड़ गई। भगवान से बस एक ही अरदास है, मुझे उठा ले और उसे वापस भेज दे। -जैसा अमरीक सिंह की मां अमरजीत कौर ने बताया 31 जुलाई को मेरी रिटायरमेंट के लिए पत्नी ने प्लानिंग कर रखी थी लेकिन अब सारी खुशियां मातम में बदल गई: अमरीक सिंह मैंने अपनी सस्पेंशन की बात प|ी को नहीं बताई थी। वो पिछले तीन साल से बीमार चल रही थी। मैं उसे किसी भी तरह का तनाव नहीं देना चाहता था। बुधवार को जब मेरी प|ी को सस्पेंशन की खबर मिल गई तो रात को उसने खाना खाने से मना कर दिया। मैंने फिर से कहा कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन उसने एक निवाला तक नहीं लिया। हम रात को थोड़ी देर टहलने भी निकले थे। सुबह 5.30 बजे वो उठी, एसी बंद किया और जब दोबारा लेटने लगी तो एकदम से चीख पड़ी। मैंने उसे तुरंत संभाला, भागकर सामने वाले घर से मदद ली और हॉस्पिटल पहुंचा, लेकिन मैं उसे नहीं बचा सका। वो हमेशा के लिए चली गई। मेरी दुनिया उजड़ गई। 31 जुलाई को मेरी रिटायरमेंट थी। उसने बहुत उत्साह से सारे रिश्तेदारों के कपड़े खरीदे थे। घर की रेनोवेशन भी उसी ने शुरू करवाई थी। रिटायरमेंट के बाद बेटी की शादी की प्लानिंग थी। बेटी कनाडा से आने वाली थी, रिश्ते की बात चल रही थी, लेकिन वो सब अरमान अधूरे रह गए। अब मेरे पास सिर्फ एक ही बात बची है इंसाफ। मैं सरकार से न्याय चाहता हूं। मेरी प|ी की मौत का जिम्मेदार परमवीर प्रिंस है। उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। -जैसा अमरीक सिंह ने बताया

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