ताजपुर और हैबोवाल के ईटीपी क्षमता अनुसार न चलने पर 3.60 करोड़ का पर्यावरण जुर्माना

भास्कर न्यूज|लुधियाना ताजपुर और हैबोवाल के ईटीपी क्षमता अनुसार न चलने पर 3 करोड़ 60 लाख का पर्यावरण जुर्माना लगाया है। साथ ही भू-जल उपयोग को लेकर डेयरियों को मीटर लगाने और टंकियों को रखने के निर्देश दिए हैं। राज्यसभा सदस्य और पर्यावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने वीरवार को बुड्‌ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर हो रहे प्रयासों को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने समीक्षा बैठक में कठोर फैसले लिए। बैठक में चंडीगढ़ से स्थानीय सरकारों विभाग के संयुक्त सचिव हरप्रीत सिंह अटवाल ने स्थानीय अफसरों से बुड्‌ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर बनी योजनाओं के बारे में जानकारी ली और प्रगति भी पूछी। अफसरों ने उन्हें बताया कि ताजपुर और हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स में लगे ईटीपी प्लांट अपनी क्षमता अनुसार नहीं चल रहे हैं। इन दोनों प्लांटों को अब तक 3 करोड़ 60 लाख का पर्यावरण हर्जाना हो चुका है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि डेयरियों द्वारा भूमि के नीचे पानी की अंधेगामी उपयोग को रोकने के लिए डेयरियों पर मीटर लगाए जाएंगे और टंकियां रखने की सलाह दी गई। उल्लेखनीय है कि डेयरियां थोड़े से पानी के लिए भी मोटरें चलाती हैं, जिससे पानी की बर्बादी ज्यादा होती है। बैठक में मौजूद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य एजेंसियों के अधिकारियों को लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। नगर निगम लुधियाना के ज्वाइंट कमिश्नर परमदीप सिंह खैरा ने बताया कि बुड्‌ढा दरिया में डेयरियों से गिर रहे गंदे पानी को रोकने के लिए काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो काम ए और सी ब्लॉक में चल रहे हैं, वे 27 अप्रैल तक पूरा हो जाएंगे। बैठक में मौजूद पीपीसीबी के अधिकारियों ने बताया कि जिन 247 प्रिंटिंग और वॉशिंग यूनिट्स के खिलाफ कार्यवाही की गई थी, उनमें से 150 फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। ये फैक्ट्रियां पीपीसीबी द्वारा निर्धारित मानकों का उल्लंघन कर रही थीं। राज्यसभा सांसद सीचेवाल ने कहा कि दरिया को प्रदूषित करने वालों पर सख्त एक्शन लिया जाए। बैठक में नगर निगम, ड्रेनेज, पंचायती विभाग, गलाडा, पीपीसीबी और अन्य विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे। इलेक्टोप्लेटिंग इंडस्ट्री की पहचान करें अफसर: संत पीपीसीबी के अधिकारियों को भी यह निर्देश दिया गया कि वे इलेक्टोप्लेटिंग इंडस्ट्री की पहचान करेंगे, जो अपना जहरीला पानी सीईटीपी में भेजने की बजाय सीवरेज में डाल रहे हैं। इससे बुड्ढा दरिया का प्रदूषण हो रहा है। यह काम एक हफ्ते के भीतर पूरा करने की हिदायत दी गई। ताजपुर इलाके में 40 से 45 डाईंग इंडस्ट्रीज हैं। इन डाईंगों द्वारा अंधेगामी पानी के इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्ती से निर्देश दिए गए हैं।

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