भास्कर न्यूज| महासमुंद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में गुरुवार को मचेवा स्थित पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास में विधिक जागरूकता थीम पर आधारित जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें कानून के विभिन्न विषयों पर आधारित सामान्य कानूनी शिक्षा के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबु जैन ने छात्राओं को महिलाओं व बालकों से संबंधित होने वाले विभिन्न प्रकार के अपराधों और अधिकारों से संबंधित चर्चा कर कानूनी जानकारी प्रदान की गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबु जैन ने नालसा के संचालित योजनाओं आैर विधिक जागरूकता पर आधारित विषयों पर सामूहिक चर्चा करते हुए छात्राओं के उत्सुक विचारों पर प्रश्न जवाब-तलब माध्यम से सरल व सहजता पूर्ण भाषाओं के माध्यम से विधिक जागरूकता पर आधारित जानकारी प्रदान किया। उन्होंने अपने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों और उनके दी जाने वाली विधिक सहायता अथवा सलाह के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 ए में सभी के लिए न्याय सुनिश्चित किया गया है, और गरीबों व समाज के कमजोर वर्गों के लिए निशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था की गई है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 22 (1) के तहत राज्य का यह उत्तरदायित्व है कि वह सबके लिए समान अवसर सुनिश्चित करे। लोगों को कानूनी सहायता व सलाह उपलब्ध कराती है समानता के आधार पर समाज के कमजोर वर्गों को सक्षम विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए एक तंत्र की स्थापना करने के लिए वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियत पास किया गया। इसी के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का गठन किया गया है, जो कानूनी सहायता कार्यक्रम लागू करने और उसका मूल्यांकन व उनके सतत निगरानी का कार्य कर लोगों को कानूनी सहायता व सलाह उपलब्ध कराती है। इसी प्रकार प्रत्येक राज्य में एक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जिसके अंतर्गत उस राज्य के पूरे सभी जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व तहसील क्षेत्रों में तालुका विधिक सेवा समिति का गठन किया गया है। इसका कार्य नालसा की नीतियों और निर्देशों को कार्य रूप देना और लोगों को निशुल्क कानूनी सेवाएं प्रदान कराना होता है। इस मौके पर अधीक्षिका चित्ररेखा तारक खांडे मौजूद थी।


