जवाहर कला केंद्र में शुक्रवार को पाक्षिक नाट्य योजना की श्रृंखला में नाटक ‘हम गूंगे हैं’ का मंचन हुआ। नाटक का लेखन एवं निर्देशन सक्षम खंडेलवाल ने किया है। इस एकल प्रस्तुति में अभिनय भी सक्षम का रहा। यह प्रस्तुति एक गांव के साधारण युवक सुधीर की कहानी है, जिसके गांव में एक बच्चा छोटू कहीं खो जाता है। सुधीर को मालूम होता है कि वह आखिरी बार बकरियों को चराने गया था और लौटकर वापस नहीं आया। छोटू के खो जाने की खबर से कोई ज्यादा विचलित भी नहीं हैं और ऐसे में यह घटना सुधीर के मन में घर कर जाती है और बार- बार उसे याद आती है। यह बच्चा रोज सुधीर से मिलता था और किसी न किसी चीज़ की मांग करता था, लेकिन अब न जाने वो कहां चला गया है। बच्चे को ढूंढने की उथल-पुथल में सुधीर एक पत्रकार अंकल से मिलता है, और उनके साथ बातचीत के दौरान वह शहरों में भीख मांगते बच्चों की सच्चाई को समझता है। वह समझता है कि जो बच्चे उसे रोज भीख मांगते दिखते हैं, वे असल में किसी गहरे शोषण का हिस्सा हैं। सुधीर को गांव के हर बच्चे में अब बस वही बच्चा नजर आ रहा है। ये असहनीय पीड़ा और एहसास उसके भीतर एक गूंगी चीख बनकर गूंजता है जिसे वह व्यक्त नहीं कर पाता। इन गुमनाम और गरीब बच्चों का कोई भविष्य नहीं, वह क्या बनेंगे और उनकी पहचान क्या है यही सवाल सुधीर को चारों ओर से घेर लेते हैं। कृष्णायन में मंचित प्रस्तुति के दौरान सक्षम ने नाटक की कहानी कहते हुए विभिन्न आवाजों जैसे ट्रेन, पक्षी, ऊंचे स्वर में गाए गीतों आदि को बिना किसी कृत्रिम यंत्र के प्रस्तुत किया और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह प्रस्तुति उन भावनाओं पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करती है जिन्हें जाने अनजाने हम नजर अंदाज कर देते हैं। नाटक में लाइट डिजाइन गगन मिश्रा, संगीत प्रवीण कुमावत और बैक स्टेज की जिम्मेदारी गौरव गौतम ने संभाली।


