भास्कर न्यूज | अमृतसर पिंजरापोल गौशाला की फोकल प्वाइंट शाखा परिसर स्थित मंदिर श्री गोविंद गोधाम में चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह का शुक्रवार को छठा दिन हो गया। कथा में आचार्य हरीश शास्त्री ने भगवान की लीलाओं का वर्णन करते कहा कि जब जीव में अभिमान आ जाता है तो भगवान उससे दूर हो जाते हैं, लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो भगवान उस पर कृपा बरसाते दर्शन देते हैं। जब बृज की गोपियों ने कन्हैया से रास रचाने का अनुरोध किया तो उन्होंने शरद पूर्णिमा की रात को महारास रचाने का निश्चय किया। महारास का अर्थ है जीवात्मा और परमात्मा का मिलन, जोकि प्रेम और समर्पण की अनूठी मिसाल है। शरद पूर्णिमा की रात को भगवान कृष्ण महारास रचाने के लिए वृंदावन आते हैं और मुरली की तान से सभी गोपियों के साथ अद्भुत नृत्य करते हैं। भगवान की महारास लीला इतनी दिव्य थी कि भगवान शंकर जी भी स्वयं को न रोक पाए और गोपी का भेष बनाकर आ गए। आचार्य ने अगले प्रसंग में राजा कंस ने भगवान कृष्ण को मारने, और गोपियां भगवान कृष्ण के रथ के आगे खड़ी हो जाने की कथा सुनाई। जिसमें महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण ने गोपियों को समझाकर शांत किया और मथुरा पहुंच कर कंस का वध किया। इसी दौरान आचार्य ने भजन “यह तो प्रेम की बात है उद्धो, बंदगी तेरे बस की नहीं है’ गाया तो उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखों में अश्रुधारा बहने लगी। कथा के अगले प्रसंग में भगवान श्री कृष्ण के विवाह का वर्णन किया गया। इस मौके पर वरिष्ठ उपप्रधान नवल गुप्ता, सचिव अजय बाजोरिया, संदीप खोसला, दिनेश अरोड़ा, हीरा लाल मौजूद थे।


