शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स से रेवेन्यू जुटाने को लेकर प्राइवेटाइजेशन करने की तैयारी में जुट गया है। रेवेन्यू बढ़ाने के लिए आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) तैयार करने को लेकर 6 मेंबरी कमेटी बनाई जा चुकी है। कमेटी में बतौर चेयरमैन सुरिंदर सिंह, ज्वाइट कमिश्नर मेंबर सेक्रेटरी, डीसीएफए कन्वीनर, 3 असिस्टेंट कमिश्नर शामिल किए गए हैं। यह कमेटी रेवेन्यू बढ़ाने को लेकर प्रस्ताव तैयार कर रिपोर्ट निगम कमिश्नर को सौंपेगी। जिसके बाद अगले निगम हाउस की मीटिंग में प्रस्ताव पास कराया जाएगा। यदि प्रस्ताव पास हो गया तो प्रॉपर्टी टैक्स वसूली के लिए प्राइवेट कंपनी को टेंडर निकाला जाएगा। फिलहाल यह प्रस्ताव कब तक निगम कमिश्नर को सौंपना होगा इसकी डेडलाइन तय नहीं है। फिलहाल यह तो तय है कि प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी का काम प्राइवेट हाथों में देने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। अब सवाल उठने लगे हैं कि 5 जोनों में उतने ही सुपरिंटेंडेंट व इंस्पेक्टर के अलावा असिस्टेंट कमिश्नर, निगम के आला अफसर निर्धारित टारगेट को पूरा कर पा रहे हैं तो प्राइवेटाइजेशन की जरूरत क्या है? बता दें कि हर साल टारगेट का 10 फीसदी अधिक टारगेट निगम के मुताबिक पूरा किया जाता रहा है। वहीं यह सवाल उठ रहे कि 12 साल से जो लोग रिटर्न भर रहे हैं उसका रिकॉर्ड क्यों मेंटेन नहीं किया जा रहा। पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी का कहना है कि सरकार ने लोगों की सहूलियत के लिए 2013-14 से सेल्फ असेसमेंट की सुविधाएं दी है। ऐसे में प्राइवेट कंपनी का क्या काम होगा। हाउस में प्रस्ताव लाने के अलावा लंबी प्रक्रिया है। प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी प्राइवेट हाथों में जाने पर ब्लैकमेलिंग का बोलबाला बढ़ेगा। अफसरों का काम तो सुपरविजन का ही बचा है। किसने कम टैक्स भरा किसने पूरा। सब प्राइवेट हो जाएगा तो अफसर-मुलाजिमों का क्या काम है उनको भी प्राइवेट कर दें। दलाली ऐसे बढ़ेगी कि प्राइवेट कारिंदे सीधे डिमांड करेंगे, इतने पैसे दो वरना स्क्रूटनी में डाल देंगे। यह तो टैक्स वसूली के लिए नया हिटलर बिठाने वाली बात है। सारा कुछ काउंटिंग में है तो वसूली अफसर क्यों नहीं कर पा रहे।


