जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई। इसमें सूरत के शैलेश कलाथिया भी शामिल थे। शैलेश परिवार के साथ छुट्टी मनाने पहलगाम पहुंचे थे। आतंकी हमले में शैलेश की पत्नी और बेटा-बेटी सुरक्षित बच गए। आतंकियों की तस्वीरें सामने आने के बाद शीतलबेन ने उस आतंकी को पहचान लिया, जिसने उनकी और बच्चों के आंखों के सामने ही गोली मारकर शैलेष कथलिया की हत्या कर दी थी। जिन चार आतंकवादियों की तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें से दाईं ओर से दूसरे आतंकी ने ही शैलेष के सीने में गोली मारी थी। शीतलबेन ने बताया कि जब वे जान बचाने भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी यही आतंकी दौड़कर उनके सामने आकर खड़ा हो गया था। इसके बाद उसने करीब दो-तीन फीट की दूरी से शैलेष के सीने में गोली मार दी थी। हरे रंग का कुर्ता-पायजामा पहने और कैमरा टांगे हुए था शीतलबेन ने आगे बताया कि इस तस्वीर में नीले कपड़े पहना यह आतंकी उस समय हरे रंग का कुर्ता और पायजामा पहने था। कुर्ते के ऊपर उसने कोट भी पहना हुआ था। साथ ही सिर पर टोपी भी थी। उस दौरान उसने कंधे पर एक कैमरा भी टांग रखा था। गोली मारने के बाद दो-तीन मिनट तक देखता रहा था
शीतलबेन ने आगे बताया कि मैंने दोनों बच्चों को अपने पीछे छिपा लिया था। इसी दौरान आतंकी ने मेरे पति के सीने में गोलियां दाग दीं। गोली लगते ही शैलेष मेरी गोद में गिर पड़े। इस दौरान गोली मारने वाला आतंकी दो-तीन मिनट तक शैलेष को देखता रहा। वह मुस्कुराते हुए यह देख रहा था कि मौत हुई या नहीं। बच्चों ने भी क्रूरता के ये सारे दृश्य देखे। वे सहमकर मुझसे लिपटे हुए थे। इसके बाद वह अपने साथियों की तरफ चला गया। इसी बीच भाग रहे कुछ स्थानीय लोगों ने हमसे कहा कि आप अपने बच्चों के साथ नीचे चले जाइये। बच्चों की जान बचाने के लिए मैं तुरंत उन्हें लेकर नीचे चली आई। शैलेष का जन्मदिन मनाने कश्मीर गए थे
शीतलबेन ने बताया कि 23 तारीख को शैलेष का जन्मदिन था। इसीलिए हम दोनों बच्चों को लेकर उनका बर्थडे सेलीब्रेट करने कश्मीर गए थे। हम लोग 18 अप्रैल की शाम कश्मीर पहुंचे थे। इसके बाद हमने श्रीनगर, सोनमर्ग, गुलमर्ग सहित कई स्थानों की यात्रा करते हुए चार दिन बिताए और 22 तारीख को पहलगाम पहुंचे थे। 24 अप्रैल को हमारी श्रीनगर से मुंबई लौटने की फ्लाइट थी। लेकिन, इससे पहले ही आतंकी हमला हो गया। मुझे दुख है कि हम वहां गए
आतंकी हमले में अपने पति को खो चुकी शीतलबेन कलथिया पर अचानक दो बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ पड़ी है। इस घटना के बाद वे कहती हैं- मुझे दुख है कि हम वहां क्यों गए? अगर हमें पता होता कि वहां कोई सुरक्षा नहीं है तो हम वहां नहीं जाते। अब पढ़ें, शैलेषभाई के 9 वर्षीय बेटे नक्श के शब्दों में पूरी घटना… शैलेश कलथिया के बेटे नक्श ने हमले के समय की स्थिति बताते हुए कहा कि कश्मीर बहुत अच्छा है। हम लोग वहां घोड़े पर सवार होकर जा रहे थे। दस मिनट बाद आतंकवादी आ गए और हम सब छिप गए, लेकिन आतंकवादियों ने हमें ढूंढ लिया। हमने दो आतंकवादियों को देखा। उन्होंने कहा कि जो हिंदू हैं वे अलग हो जाएं और जो मुसलमान हैं वे अलग हो जाएं। फिर उन्होंने कलमा पढ़ने को कहा। उन्होंने मुस्लिमों को छोड़ दिया और जो हिंदू थे उन्हें गोली मार दी। फिर वे लोग चले गए। हम सभी को भाग जाने को कहा गया। मुझे घोड़े पर बिठाया गया और मेरी बहन और मां पैदल चलीं। एक समय तो ऐसा लगा कि हमारी मौत निश्चित है। मेरी मां मेरे पिता को छोड़कर नहीं जाना चाहती थीं, लेकिन हमारी वजह से उन्हें हमारे साथ आना पड़ा। घटना के समय हम 20-30 लोग थे। सेना कुछ देर बाद आई। दो और गुजरातियों (पिता-पुत्र) को मौत हुई गुजरात से 20 लोगों का एक ग्रुप भी जम्मू-कश्मीर गया था। इनमें भावनगर के कालियाबीड़ में रहने वाले यतीशभाई परमार, पत्नी काजलबेन और बेटा स्मित यतीशभाई शामिल थे। आतंकियों ने काजलबेन को छोड़ दिया, जबकि उनके पति और बेटे को गोली मार दी थी। भावनगर निवासी 45 वर्षीय यतीशभाई परमार कालियाबीड़ इलाके में हेयर सैलून चलाते थे। जबकि, उनका 17 वर्षीय बेटा स्मित 11वीं कक्षा का स्टूडेंट था। हलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… आर्मी वर्दी वाला आया; पूछा- तुम हिंदू हो, हां सुनते ही AK-47 से 3 गोलियां मारीं करनाल के नेवी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल गुरुग्राम की रहने वाली पत्नी हिमांशी के साथ घूम रहे थे। हिमांशी की बात पूरी भी न हुई थी कि सेना की वर्दी में एक व्यक्ति हाथ में AK-47 लिए ठीक उनके सामने आ खड़ा हुआ। हिमांशी को लगा, इंडियन आर्मी का जवान है। तभी उस व्यक्ति ने पूछा- क्या तुम हिंदू हो? पूरी खबर पढ़ें… मौत से पहले बेटे से कहा- देख तेरी मां कितनी हिम्मत वाली है; आतंकी हर लाश के साथ सेल्फी ले रहे थे 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में इंदौर के सुशील नथानियल की मौत हो गई। वे बेटे ऑस्टिन गोल्डी, बेटी आकांक्षा और पत्नी जेनिफर के साथ कश्मीर घूमने गए थे। गुरुवार को इंदौर में सुशील के अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे ऑस्टिन गोल्डी ने दैनिक भास्कर से बात की। पूरी खबर पढ़ें… पति की शर्ट पहनी, फिर उसी से लिपट गई; CM बोले- ताबूत में ये आखिरी कील पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए कानपुर के शुभम द्विवेदी का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। चाचा नरेंद्र ने मुखाग्नि दी। पिता बगल में खड़े होकर रोते रहे। गुरुवार सुबह 11 बजे जब घर से ड्योढ़ी घाट के लिए शव यात्रा निकली तो पत्नी ऐशन्या चीख पड़ीं। पूरी खबर पढ़ें..


