राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने विकलांगता के आधार पर भर्ती से अयोग्य करार दिए गए अभ्यर्थी को राहत दी है। युवक को विशेष योग्यजन कानून के तहत जारी स्थायी विकलांगता प्रमाण पत्र होने के बावजूद दोबारा शारीरिक जांच में विकलांगता का प्रतिशत बढ़ा मानकर या अन्य शारीरिक अंग में कुछ विकलांगता होना बताकर भर्ती से अयोग्य करार दिया गया था। हाईकोर्ट की जस्टिस रेखा बोराणा ने एमजीएच में यूटीबी नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत अभ्यर्थी के डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट को कंसीडर करते हुए 6 सप्ताह में सभी परिलाभ सहित नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं। नर्सिंग ऑफिसर की नियमित भर्ती-2023 का मामला विशेष योग्यजन रामदयाल सारण को नर्सिंग ऑफिसर की नियमित भर्ती-2023 में उसके एक पैर में 40 प्रतिशत लोकोमोटर डिसएबिलिटी होने और इसका विकलांगता प्रमाण पत्र होने के बावजूद, उसकी अभ्यर्थिता यह खारिज कर दिया गया था। कहा गया- जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज में पुन: शारीरिक परीक्षण करने पर उसके दूसरे पैर में भी विकलांगता पाई गई है। इस पर रामदयाल की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी और एडवोकेट सुषमा ने रिट याचिका दायर कर याची को अपात्र घोषित करने को चुनौती दी। याचिका में बताया गया- जिस व्यक्ति के एक पैर में 40 प्रतिशत या उससे अधिक विकलांगता है, तो उस व्यक्ति के दूसरे पैर पर भी प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि पूरे शरीर का वजन उसी दूसरे पैर पर शिफ्ट होता ही है। उम्मीदवारी खारिज करने का कारण उचित नहीं अधिवक्ता खिलेरी ने बताया- याचिकाकर्ता के दूसरे पैर में मामूली अतिरिक्त शारीरिक विकलांगता के आधार पर उसकी उम्मीदवारी खारिज करना अधिनियम की धारा 4 का उल्लंघन है। इस आधार पर दिव्यांग को सार्वजनिक रोजगार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, ताकि विशेष योग्यजन व्यक्तियों को समाज मे बिना भेदभाव के समान अवसर व सम्मानजनक जीवन मिल सके। नियमानुसार 1995 के अधिनियम अथवा 2016 के अधिनियम के तहत जारी स्थायी विकलांगता प्रमाण पत्र के अस्तित्व में होने पर उसका विकलांगता जांचने के उद्देश्य से पुनः शारीरिक परीक्षण किया ही नहीं जा सकता है। यूटीबी आधार पर मान्य, फिर स्थायी नियुक्ति में अमान्य क्यों? याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि वह वर्तमान में विकलांग कोटे में चयनित होकर नर्सिंग ऑफिसर/जीएनएम पद (यूटीबी आधार पर) पर अपनी संतोषप्रद सेवाएं राजकीय महात्मा गांधी अस्पताल जोधपुर में दे रहा है। ऐसे में अस्थायी आधार पर तो विकलांगता प्रमाण पत्र को मान्य किया गया है, लेकिन नियमित भर्ती में उसी विकलांगता प्रमाण पत्र को अमान्य किया जाना हास्यास्पद है। रिट याचिका की अंतिम सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए हाइकोर्ट की जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के विशेष योग्यजन अधिनियम के तहत जारी विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नर्सिंग ऑफिसर पद पर छह सप्ताह के भीतर सभी पारिणामिक परिलाभ के साथ नियुक्ति देने का निर्णय दिया।


