भारतमाला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण और 48 करोड़ रुपए के मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई जारी रही। शनिवार को शाखा के अफसरों ने भू स्वामी, जमीन दलाल और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें महादेव घाट निवासी उमा तिवारी और उसके पति केदार तिवारी शामिल है। दोनों के खाते में मुआवजे के 2.13 करोड़ रुपए लिए। इन पैसों में से इन्होंने 1.7 करोड़ रुपए महासमुंद के ठेकेदार व प्रॉपर्टी डीलर हरमीत सिंह खनूजा और गोलबाजार के कारोबारी विजय जैन को दिए थे। चारों आरोपियों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने चारों आरोपियों को ईओडब्ल्यू को 1 मई तक रिमांड पर सौंप दिया। घोटाले में नाम आने के बाद से तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर निर्भय साहू, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक रोशन लाल वर्मा, पटवारी समेत अन्य आरोपी गायब हैं। महिला मठ की जमीन की फर्जी वारिस बनी, जाली दस्तावेज से मुआवजा लिया प्रमोद साहू की रिपोर्ट भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले की प्रारंभिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मुआवजे की रकम हड़पने के लिए प्रोजेक्ट आने के पहले ही अधिकारियों ने साजिश रची। फर्जी भू स्वामी ढूंढ़ा। इसके लिए पटवारी, राजस्व निरीक्षक से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों ने सिंडीकेट बनाया। सिंडीकेट के अहम सदस्य हरमीत सिंह खनूजा व विजय जैन ने महादेव घाट निवासी केदार तिवारी से संपर्क किया। उन्हें लालच दिया। केदार 55 वर्षीय पत्नी उमा देवी तिवारी के नाम से दस्तावेज बनवाने को राजी हो गए। साजिश के तहत आरोपियों ने जैतू साव मठ की एक एकड़ से ज्यादा जमीन का उमा देवी के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। भूमि रिकॉर्ड में नाम चढ़ाया। पटवारी ने मुआवजे की रिपोर्ट बनाकर भेजी। उसके बाद उमा देवी को 2 करोड़ 13 लाख रुपए का मुआवजा भुगतान हो गया। इसमें 43 लाख रुपए तिवारी दंपती ने अपने पास रखे। बाकी हरमीत और विजय को दे दिए। दोनों ने पटवारी, तहसीलदार, डिप्टी कलेक्टर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बंदरबांट की। मठ की 11 में से 1 एकड़ पर कब्जा दिखा साजिश को अंजाम दिया
भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (एसीबी) की पड़ताल में सामने आया है कि जैतू साव मठ को नवा गांव और काया बांधा के आसपास 11 एकड़ जमीन दान में मिली है। इसकी देखरेख मठ से जुड़े विश्वनाथ पांडेय के जिम्मे थी। जमीन पर किसी का कब्जा न हो, इसलिए रजिस्ट्री विश्वनाथ के नाम पर करा दी गई, लेकिन लेन-देन उधार में बताया गया। इससे विश्वनाथ जमीन को बेच न सके। जब भारत माला प्रोजेक्ट आया तो जमीन दलाल ने एक एकड़ से ज्यादा जमीन पर कब्जे की प्लानिंग की। उनकी मृत्यु के बाद उनके चारों बेटे और एक बेटी भी सिर्फ इस जमीन की देखरेख ही कर सकते थे, उसे बेच नहीं सकते थे। जब भारतमाला प्रोजेक्ट आया तो दलाल ने एक एकड़ से ज्यादा जमीन पर कब्जे की प्लानिंग की। इसके लिए उमा तिवारी की एंट्री कराई और उन्हें विश्वनाथ पांडेय की गोद ली हुई बेटी बताया। इसी आधार पर वारिस नामा तैयार कराया। फिर पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार के साथ मिलीभगत कर सरकारी रिकॉर्ड में उमा के नाम जमीन दर्ज करवा दी गई। एनएचएआई में मुआवजा के लिए दावा किया, जिसे कलेक्टर ने मंजूर कर मुआवजा भी जारी कर दिया। जैतू साव मठ ने उमा देवी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री का विरोध किया था। प्रशासन से दस्तावेजों के साथ लिखित शिकायत भी की थी, लेकिन ध्यान नहीं दिया।
ठेकेदार की तहसीलदार पत्नी की भूमिका की जांच जारी ठेकेदार हरमीत सिंह खनूजा की पत्नी तहसीलदार हैं। उमा के अलावा और भी किसानों के नाम पर हरमीत और विजय ने फर्जी दस्तावेज बनाए हैं। फर्जी तरीके से रिकॉर्ड को सुधरवाया है। ईओडब्ल्यू इसमें हरमीत की तहसीलदार पत्नी की भूमिका की जांच कर रही है।
तत्कालीन कलेक्टरों के फैसलों की पड़ताल चल रही आईएएस अधिकारी भारती दासन, सौरभ कुमार और डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे तीनों रायपुर कलेक्टर रहे हैं। इनके कार्यकाल में ही जमीन अधिग्रहण शुरू हुआ था और मुआवजा जारी किया था। इसके अलावा कुछ कांग्रेस के नेताओं की भूमिका की जांच की जा रही है।


