पाकुड़ जिले के गोकुलपुर स्थित घोषपाड़ा में वैशाख अमावस्या पर मां काली की पूजा का आयोजन किया गया। पुरोहित ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। स्थानीय परंपरा के अनुसार, नीम के पेड़ के नीचे मां काली की प्रतिमा स्थापित की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विशेषकर महिला भक्त वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा में शामिल हुए। भक्तों ने मां को फल, फूल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की। पाकुड़ जिले के हिरणपुर, महेशपुर, अमड़ापाड़ा और पाकुड़िया के ग्रामीण क्षेत्रों में भी मां काली की पूजा की गई। कई स्थानों पर पाठा की बलि दी गई और महाप्रसाद का आयोजन किया गया। पुरोहितों द्वारा बताया गया कि वैशाख अमावस्या में मां काली की पूजा का विशेष महत्व है। मां काली की प्रतिमा का इस दौरान श्रृंगार किया जाता है और मां की पूजा पूरी विधि विधान से की जाती है। इतना ही नहीं मां को बकरे की बलि भी दी जाती है और फिर लोग पूरे उल्लास के साथ महाप्रसाद का वितरण करते हुए महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। पुरोहितों के अनुसार, वैशाख अमावस्या पर मां काली की पूजा विशेष महत्व रखती है। इस दिन मां की प्रतिमा का श्रृंगार कर पूजा की जाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मां की पूजा से घर में सुख-शांति आती है। लोग यहां मन्नत मांगते हैं और मन्नत पूरी होने पर पूजा-अर्चना करते हैं। दोपहर के बाद विभिन्न स्थानों पर मां काली की प्रतिमा का विसर्जन किया गया।


