वित्तमंत्री चौधरी ने पंजीयन विभाग के अफसरों को दिए निर्देश:रजिस्ट्री विभाग में आधार प्रमाणीकरण आटो डीड जैसी 10 नई सु​विधाएं जुड़ेंगी

छत्तीसगढ़ के रजिस्ट्री दफ्तरों में जल्द ही दस नई सुविधाएं शुरू होने जा रही है। विभाग की वेबसाइट में ये सभी सुविधाएं अपडेट की जा रही है। सोमवार को वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने पंजीयन विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर राजस्व आय, पंजीबद्ध दस्तावेजों तथा मुद्रांक एवं आरआरसी प्रकरणों के विषय में जिलेवार जानकारी ली। राज्य सरकार द्वारा होम विजिट के माध्यम से पंजीयन कराने की सुविधा, तत्काल अपाईंटमेंट का प्रावधान सहित पारिवारिक दान, हकत्याग आदि में 500 रुपए का पंजीयन शुल्क लिया जा रहा है। वहीं अब तक 2979 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया गया है। मं त्री चौधरी ने अफसरों को बताया कि विभाग को तकनीकी रुप से मजबूत करने के लिए विभागीय सेटअप में बदलाव करते हुए नए पद सृजित किए गए हैं ताकि मैदानी अमला तेजी से जांच-पड़ताल कर दस्तावेजों का पंजीयन कर सके। चौधरी द्व्रारा पंजीयन अधिकारियों को सभी नए प्रावधानों को लागू करने के पूर्व जानकारी दी गई तथा इनके प्रभावी रूप से सफल क्रियान्वयन करने तथा आम जनता को सहयोग करने के लिए निर्देशित किया गया। विभाग में ये 10 नई सुविधाएं होंगी शमिल 1. आधार से प्रमाणीकरण : वर्तमान में पक्षकारों की शिनाख्ती दो गवाहों के माध्यम से की जाती है। अब आधार से लिंक होने से बायोमेट्रिक के माध्यम से पक्षकार की पहचान आधार डाटा बेस से की जाएगी। 2. ऑनलाइन सर्च एवं डाउनलोड की सुविधा: अभी रजिस्ट्री की जानकारी खुद या वकील के माध्यम से करते हैं। अब निर्धारित शुल्क का भुगतान कर खसरा नंबर की सभी रजिस्ट्री का ब्यौरा देखकर उसकी प्रति डाउनलोड कर सकते हैं। 3. भारमुक्त प्रमाणपत्र: संपत्ति खरीदने से पहले उसके भार या बंधक होने की जानकारी जरूरी है। इसलिए भारमुक्त प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। 4. एकीकृत कैशलेस भुगतान: पंजीयन शुल्क के भुगतान को कैशलेश किया गया है। पहले स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन फीस का भुगतान अलग-अलग करना पड़ता था लेकिन अब दोनों शुल्क का भुगतान एक साथ होगा। 5. व्हाट्सअप मैसेज: पंजीयन प्रणाली में पक्षकारों को आवेदन की स्लाट बुकिंग, पंजीकरण की प्रगति और पूरा होने की व्हाट्सअप की जाएगी। 6. डिजीलॉकर की सुविधा: रजिस्ट्री दस्तावेजों को केंद्र सरकार की ​डिजीलॉकर सुविधा से सुरक्षित स्टोर किया जा सकेगा। 7. आटो डीड जनरेशन: वर्तमान में अलग-अलग लोगों के पास जाकर दस्तावेज तैयार करना पड़ता था, लेकिन अब विलेख प्रारुप का चयन कर कंप्यूटर में अपलोड करने पर दस्तावेज स्वत: तैयार हो जाएगा। 8. डिजी डॉक्यूमेंट की सुविधा: डिजीडॉक सेवा विकसित की गई है। इसके माध्यम से कोई भी दैनिक उपयोग का दस्तावेज तैयार कर सकेगा। 9. घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा: अब रजिस्ट्री के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। ऑनलाइन से घर बैठे ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। 10. स्वतः नामांतरण की सुविधा: इससे पक्षकारों को बिचौलियों से मुक्ति के साथ नामांतरण की लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरना नहीं पड़ेगा। यह सुविधा अभी मात्र आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं तमिलनाडु राज्यों में ही है।

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