राजस्थान क्राइम फाइल्स में आज 10 साल पुराना पाली जिले का केस। गुरुकुल में संस्कृत शिक्षा लेने वाले 7 साल के मासूम की चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। हत्या से पहले उसका गला भी दबाया गया था। हत्या के बाद उसके शव को गुरुकुल के पास एक खेत में फेंक दिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 4 जुलाई 2015 की शाम करीब 4 बजे पाली शहर के कोतवाली थाना के लैंडलाइन नंबर पर फोन आया। फोन करने वाले ने कहा-सर! नया गांव फ्लाईओवर के पास एक खेत में बच्चे की लाश पड़ी है। लाश अर्धनग्न हालत में है। सूचना मिलते ही तत्कालीन कोतवाली थानाधिकारी देरावरसिंह सोढ़ा पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंच गए। शव की जांच की गई। शिनाख्त खेत में पास ही संचालित होने आर्य समाज के गुरुकुल आश्रम में रहने वाले शिष्य सव्य सांची उर्फ चिंटू निवासी रूड़की (हरिद्वार) के रूप में हुई। सव्य के सिर पर चाकुओं से गोदने और मिट्टी के ढेले से वार करने के निशान थे। साथ ही उसका गला घोंटने की भी कोशिश की गई थी। जिस तरह से हत्या की गई, उससे लग रहा था कि हत्यारे से सव्य पर अपना पूरा गुस्सा निकाला था। जहां शव मिला, वहां दो पक्षों में विवाद पाली शहर में पहली बार ऐसा घटनाक्रम हुआ था। जब 7 साल के मासूम की इतनी निर्मम तरह से हत्या की गई हो। जिस जगह सव्य की हत्या हुई थी, वहां पहले से संपत्ति को लेकर दो पक्षों में विवाद चल रहा था। सभी आश्रम में रहने वाले स्टाफ और अन्य बच्चों ने जानकारी जुटाई। जिसके बाद पुलिस ने सव्य की हत्या को लेकर पहला सुराग मिला। 7 महीने पहले ही गुरुकुल में आया था सव्य सांची उर्फ चिंटू पुत्र रविंद्र कुमार सैन हरिद्वार के रूड़की का रहने वाला था। उसकी वैदिक अध्ययन में काफी रूचि थी। पाली के गुरुकुल में सव्य का मौसेरा भाई सौरभ आचार्य था। सौरभ सव्य को अपने साथ संस्कृत शिक्षा दिलवाने 7 महीने पहले ही पाली लेकर आ गया था। सव्य उर्फ चिंटू की संस्कृत पर इस कदर पकड़ थी कि वह बिना देखे ही संस्कृत के श्लोक का उच्चारण और उसका सार बताता था। संस्कृत के श्लोक उसे कंठस्थ थे। गुरुकुल का सबसे छोटा शिष्य था। इसके चलते वह सबका लाड़ला भी था। पुलिस को गुमराह करने के लिए साक्ष्य पैदा किए पुलिस को घटना स्थल पर ऐसे कई सुराग मिले। जिससे लग रहा था कि हत्यारे से कई सुराग पुलिस को गुमराह करने के लिए जानबूझकर छोड़े हैं। गुरुकुल के मुख्य भवन से बच्चों का बाथरूम करीब 200 फीट दूर था। सव्य की हत्या 4 जुलाई की दोपहर में मानी जा रही थी। आश्रम में रहने वाले सभी बच्चे सुबह जल्दी स्नान कर लेते थे। इसके बाद उन बाथरूम का उपयोग वह नहीं करते थे। जबकि शव को उसी बाथरूम से पीछे की तरफ खेत में डाला गया था। आश्रम के प्रबंध ने कहा दोपहर में चिंटू ने पपीता खाया था पुलिस ने आश्रम में रहने वाले स्टाफ व स्टूडेंट से पूछताछ की। कुछ स्टूडेंट के बताए अनुसार आश्रम प्रबंध के लोगों ने पुलिस को बताया कि सव्य ने हत्या से पहले दोपहर को करीब 1.30 बजे पपीता काटकर खाया था। पपीता खाने के बाद वह चाकू और प्लेट धोने के लिए उन बाथरूम की तरफ गया था। इसके बाद से सव्य को किसी ने नहीं देखा था। दो घंटे तक सव्य नहीं मिला तो आश्रम में उसकी तलाश की गई। 3.45 बजे उसका शव बाथरूम के दूसरी तरफ खेत मिला। दोबारा डॉग स्क्वायड कमरे में ही आकर रुका सव्य की हत्या के मामले को देखते हुए जोधपुर से डॉग स्क्वायड को बुलाया गया था। स्क्वायड में शामिल डॉग को घटना स्थल पर मिले बच्चे के कपड़े सुंघाए गए। उसके बाद वह खोज करते हुए सव्य के कमरे में आकर ही रूक रहा था। पुलिस डॉग को दो से तीन बार घटना स्थल पर लेकर गई लेकिन डॉग फिर से कमरे में ही आ रहा था। पुलिस के सामने इस हत्याकांड को लेकर कई सवाल थे, जो आश्रम के ही किसी व्यक्ति पर हत्या का शक पैदा कर रहे थे… इन सवालों के बीच पुलिस को आश्रम में ही रहने वाले 14 साल के शिष्य का व्यवहार अलग लगा। उसे डिटेन कर पूछताछ की। इसी पूछताछ के आधार पर पुलिस ने सव्य के मौसेरे भाई सौरभ को भी हिरासत में लिया। शुरुआत में तो सौरभ मनगढ़ंत कहानियां बना रहा था। जब पुलिस ने सख्ती की तो उसने हत्या करने कबूल कर लिया। हत्या का कारण जो उसने बताया, वह चौंकाने वाला था। पार्ट 2 में पढ़िए…क्या थी हत्या की वजह? गंदे वीडियो देखने वाला भाई ही निकला हत्यारा:आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया था, राज खुलने के डर से ली मासूम की जान, पार्ट-2


