अमूर फाल्कन या बाज बहुत ही रोचक प्रवासी शिकारी पक्षी है। हर साल सर्दियों में यह छोटा-सा शिकारी पक्षी साइबेरिया और चीन के प्रजनन स्थलों से दक्षिणी अफ्रीका के लिए साहसी यात्रा करते हैं। फाल्कन अपने प्रवास के दौरान अरब सागर को पार करते हैं, लेकिन उनके अनुमानित 22,000 किलोमीटर के प्रवास के पैटर्न के बारे में अभी भी बहुत कुछ अज्ञात है। प्रवास के दौरान समुद्र में लंबी दूरी तक भटकने की अपनी प्रवृत्ति के कारण, अमूर बाज अपनी सामान्य सीमा से बहुत दूर स्थानों पर भी पाए गए हैं। अभी अफ्रीका में प्रवास के बाद इनकी वापसी का समय है। ये वापस साइबेरिया लौट रहे हैं। पक्षी प्रेमी कैप्टन सुशील कुमार ने बताया कि अमूर फाल्कन का एक जोड़ा रांची के होरहाप जंगलों में सोमवार 28 अप्रैल की सुबह के समय विश्राम करते हुए दिखाई दिए। उन्होंने इसकी तस्वीर खींची। खा-पीकर और आराम करके कुछ ही देर में यह जोड़ा वहां से अपनी मंजिल की ओर निकल पड़े। रांची में इनकी उपस्थिति पहली बार दर्ज की गई है। वैसे झारखंड में इससे पहले दो-तीन बार यह बाज दिखाई दिए हैं। माना जाता है कि 22 हजार किलोमीटर की यह यात्रा किसी भी शिकारी पक्षी की सबसे लंबी समुद्री यात्रा है। देखने में खूबसूरत यह पक्षी शिकार में काफी क्रूर होते हैं। नर अमूर फाल्कन मादा अमूर फाल्कन _photocaption_कैप्टन सुशील कुमार*photocaption*
नगालैंड है पड़ाव घने जंगलों में रुककर भरपूर कीड़े खाते हैं अमूर फाल्कन के लिए नगालैंड सर्दियों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्टॉपओवर साइट है, यहां ये अपनी अफ्रीका की विशाल यात्रा के लिए तैयार होते हैं और नगालैंड के घने जंगलों में भरपूर संख्या में कीड़ों का सेवन करते हैं। यह दक्षिण-पूर्व रूस और उत्तरी चीन में प्रजनन करते हैं। भारत से होकर पश्चिम की ओर अरब सागर के पार दक्षिणी अफ्रीका में प्रवास करते हैं। अरब सागर के ऊपर उनका प्रवास ड्रैगनफ़्लाई के प्रवास के समय के साथ मेल खाता है और माना जाता है कि ये उनके प्रवास मार्ग के सबसे कठिन हिस्से के दौरान ये ड्रैगनफ़्लाई ही भोजन प्रदान करते हैं।


