भास्कर न्यूज | बालोद छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण नीति को दोषपूर्ण बताया। संगठन ने कहा कि अतिशेष शिक्षकों का समायोजन जरूरी है, लेकिन विभाग को यह बताना चाहिए कि शालाओं में तय पदों से अधिक शिक्षकों की पोस्टिंग किस अधिकारी ने की। ऐसे अधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए। शिक्षकों की कोई गलती नहीं है, क्योंकि उनकी पदस्थापना विभाग ने ही की है। सेटअप के विपरीत युक्तियुक्तकरण का नियम स्वीकार नहीं है। 2008 के सेटअप का पालन हो, जिससे गुणवत्ता बढ़ेगी। एसोसिएशन ने मांग की कि जिन अधिकारियों की वजह से शिक्षक अतिशेष हुए, उनके खिलाफ कार्रवाई हो। शालाओं में पद कम करने से निजी स्कूलों को फायदा होगा। सेटअप के अनुसार पदस्थ शिक्षकों की कोई गलती नहीं है। नीति की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि प्रत्येक शाला में न्यूनतम छात्र संख्या पर एक-एक पद कम किया गया है। एक ही परिसर की शालाओं को जोड़ने से प्रबंधन कमजोर होगा। इससे सम्बद्ध शालाओं के प्रधान पाठक का पद खत्म होगा। इससे पदोन्नति के अवसर घटेंगे। संगठन के जिलाध्यक्ष दिलीप साहू, प्रदेश संगठन सचिव बीरबल देशमुख, जिला संयोजक रामकिशोर खरांशु, कामता प्रसाद साहू, जिला उपाध्यक्ष शिव कुमार शांडिल्य, वीरेन्द्र देवांगन, पवन कुमार जोशी, कांतिलाल चंदेल, नीलेश देशमुख, जिला सचिव नरेन्द्र कुमार साहू, जिला कोषाध्यक्ष पवन कुमार कुम्भकार, जिला आईटी सेल प्रभारी हरीश कुमार साहू, शिवेंद्र बहादुर साहू, महेंद्र टांडिया, रघुनंदन गंगबोईर, जिला महामंत्री लेखराम साहू, शेषलाल साहू, राजेश चंद्राकर, संजय ठाकुर, रवींद्र नाथ योगी सहित सभी पदाधिकारियों ने कहा कि इस नीति से शिक्षा की गुणवत्ता गिरेगी। पदाधिकारी बोले- यह नियम व्यवहारिक नहीं है एसोसिएशन ने कहा कि प्राचार्य, व्याख्याता, शिक्षक, प्रधान पाठक के पदों पर पहले पदोन्नति हो। 2008 के सेटअप में मिडिल स्कूल में न्यूनतम छात्र संख्या पर एक प्रधान पाठक और चार शिक्षक का नियम था। इसी आधार पर भर्ती और पदोन्नति हुई। अब एक पद घटाने से एक शिक्षक अतिशेष हो जाएगा। यह नियम व्यवहारिक नहीं है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लंघन है। 2 अगस्त 2024 के युक्तियुक्तकरण नियम में इस सेटअप को मान्यता दी जाए।


