लुधियाना में AAP ने घेरा भाजपा का दफ्तर:केंद्रीय राज्य मंत्री का पुतला फूंका, बोले-पानी मुद्दे पर पंजाब के साथ गद्दारी कर रहे बिट्टू

लुधियाना में गुरुवार (1 मई) को आम आदमी पार्टी (AAP) के जिला नेतृत्व ने भाजपा कार्यालय का घेराव किया। भाजपा के जिला पदाधिकारियों के सामने आप नेताओं ने भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए। आप नेताओं ने केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का पुतला भी फूंका। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ के खिलाफ भी नारेबाजी की। बता दें कि पंजाब और हरियाणा सरकार के बीच 1981 में जल समझौता हुआ था। इसके तहत पंजाब भाखड़ा नहर से हरियाणा और राजस्थान को पानी देता है। अभी तक पंजाब हरियाणा को रोजाना 9.5 हजार क्यूसेक पानी दे रहा था, जिसे 15 दिन पहले घटाकर 4 हजार क्यूसेक कर दिया गया है। धरने में शामिल कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि बिट्टू ने पंजाबियों की पीठ में छुरा घोंपा है। वह पंजाब का पानी हरियाणा को देने के पक्ष में हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी एक बूंद भी अपने हिस्से का पानी नहीं देगी। सभी पंजाबी अपने खून से ज्यादा अपने पानी से प्यार करते हैं। रवनीत बिट्टू पंजाब में रहकर पंजाबियों से गद्दारी कर रहे हैं। भाजपा की इस घटिया चाल की सभी आप वर्कर निंदा करते हैं। पानी की लड़ाई सभी एकजुट होकर लड़ने जा रहे हैं। रवनीत बिट्टू हमेशा ही पंजाबियों के बारे गलत शब्दावली का इस्तेमाल करते आए हैं। मान सरकार पटरी उतार रही किसान और केन्द्र की बातचीत को-बिट्टू उधर, रवनीत सिंह बिट्टू ने मीडिया समक्ष कहा है कि किसानों ने स्पष्ट रूप से केन्द्र से कहा है कि अगर पंजाब सरकार 4 मई को होने वाली बैठक में शामिल होती है तो वह बैठक में शामिल नहीं होंगे। मान सरकार केन्द्र सरकार और किसानों के बीच चल रही बातचीत को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही है। मान सरकार ने अचानक से पानी का मुद्दा उठाया और राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। पंजाब और हरियाणा के बीच पानी का क्या विवाद हुआ
पंजाब और हरियाणा सरकार में 1981 में पानी का समझौता हुआ था। इसके तहत भाखड़ा नहर से पंजाब हरियाणा और राजस्थान को पानी देता है। अभी तक पंजाब हरियाणा को डेली साढ़े 9 हजार क्यूसिक पानी दे रहा था, जिसे 15 दिन पहले से घटाकर 4 हजार क्यूसिक कर दिया गया है। पंजाब CM भगवंत मान ने कहा- पानी का जो हिसाब-किताब होता है, यह 21 मई से शुरू होकर अगले साल की 21 मई तक का होता है। इसमें कोटा फिक्स होता है। हरियाणा अपने कोटे का पानी मार्च में खर्च कर चुका। पेयजल की किल्लत न हो, इसलिए 4 हजार क्यूसिक पानी दे रहे हैं। हरियाणा के CM नायब सैनी ने इसे लेकर पंजाब CM भगवंत मान से बात की है। हरियाणा सरकार से जुड़े सोर्सेस के मुताबिक, CM सैनी ने पंजाब CM मान को कहा है कि यह फैसला ठीक नहीं है। जल्द ही उन्हें हरियाणा को शर्तों के हिसाब से पूरा पानी देना पड़ेगा। हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की। जिसमें हरियाणा में जल संकट की स्थिति पर चर्चा की। इस मामले में अब केंद्र का हस्तक्षेप हो सकता है। हरियाणा के CM ने कहा- पंजाब के सीएम का बयान आश्चर्यजनक है। मैंने 26 अप्रैल को फोन कर कहा था कि पंजाब के अधिकारी फैसला नहीं मान रहे। उन्होंने कार्रवाई का भरोसा दिया लेकिन 27 अप्रैल तक कुछ नहीं किया। पंजाब के अफसरों ने हरियाणा के अधिकारियों के फोन भी नहीं उठाए। अब 48 घंटे तक पत्र का जवाब देने की बजाय मान ने पंजाब में अपनी राजनीति चमकाने के लिए तथ्यों को दरकिनार करते हुए देश की जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया है। हरियाणा पर इसका कितना असर पड़ेगा
पंजाब सरकार ने 15 दिन पहले पानी रोका। हालांकि हरियाणा के सिंचाई अधिकारियों का कहना है कि इसका ज्यादा असर 20 मई तक दिखेगा। हालांकि 22 मई से हरियाणा सरकार का नया कोटा चालू हो जाएगा तो पंजाब फिर से डेली साढ़े 9 हजार क्यूसिक पानी छोड़ सकता है। हालांकि तब तक हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, रोहतक, महेंद्रगढ़ में पेयजल और सिंचाई के पानी का संकट हो सकता है।

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