प्रदेश में बीएड डिग्रीधारी को हटाने के लिए डीएलएड वालों ने लंबी लड़ाई लड़ी। इसके चलते 2621 बीएड वालों को सहायक शिक्षक के पद से हटा दिया गया। इसके बाद जब डीएलएड वालों को उनकी जगह भर्ती के लिए बुलाया गया, तो 40 प्रतिशत यानी हजार से अधिक पहुंचे ही नहीं। अफसरों का कहना है कि भर्ती के लिए एक ही राउंड की काउंसिलिंग के निर्देश थे, वो हो चुकी है। जो पद खाली रह गए हैं वे अगली भर्ती तक खाली रहेंगे। वेटिंग वालों को मौका नहीं मिलेगा। बीएड वालों को नौकरी से हटाए जाने के बाद कितने डीएलएड उम्मीदवारों ने जॉइन किया इसे लेकर दैनिक भास्कर ने पड़ताल की। इसमें पता चला कि जिन जिलों में जितनी संख्या में जिस संवर्ग यानी हटाया गया था, उस जिले में उतनी ही संख्या में संवर्ग वार डीएलएड अभ्यर्थियों को नौकरी देने बुलाया गया। जैसे, जशपुर में अनारक्षित के 92, अनुसूचित जाति के 18, अनुसूचित जनजाति के 221 और ओबीसी के 50 यानी कुल 386 सहायक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गई। इस जिले में मेरिट क्रमानुसार ऐसे ही संवर्ग वार नियुक्ति देने का फार्मूला तैयार किया गया था। जब काउंसिलिंग की प्रक्रिया शुरू हुई तो बड़ी संख्या में डीएलएड उम्मीदवार दस्तावेज सत्यापन में पहुंचे हीं नहीं। कांकेर में 440 बीएड डिग्रीधारी उम्मीदवारों को हटाया गया था। वहां 169 डीएलएड वालों की नियुक्ति हुई। कोंडागांव में 353 को हटाया गया। इनकी जगह 190 की नौकरी लगी। ऐसी स्थिति बस्तर व सरगुजा संभाग के अन्य जिलों में भी रही। जानिए क्या था पूरा मामला सरकारी स्कूलों में शिक्षक, सहायक शिक्षक समेत अन्य के लिए 2023 में भर्ती निकली थी। कुल 12489 पदों की यह भर्ती बस्तर व सरगुजा संभाग के लिए थी। व्यापमं ने 2023 में परीक्षा कराई। रिजल्ट के आधार पर भर्ती के लिए चार चरण में काउंसिलिंग हुई। करीब दस हजार से अधिक पदों पर भर्ती हुई। इसमें से 2621 अभ्यर्थी थे, जो बीएड के आधार पर सहायक शिक्षक बने थे। उन्होंने कई महीने नौकरी भी की। जनवरी 2025 में कोर्ट के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इनकी जगह ही शिक्षक भर्ती 2023 में शामिल डीएलएड उम्मीदवारों को नौकरी देने का निर्णय लिया गया था। वजह: दूर थी पोस्टिंग, कई अपात्र थे, कुछ पहले से नौकरी में
यह भर्ती सरगुजा और बस्तर संभाग के लिए थी। जिस स्कूल से बीएड वालों को हटाया गया था, वहीं डीएलएड वालों की भर्ती होनी थी। अधिकारियों का कहना है कि कई अभ्यर्थी दूर-दराज क्षेत्र में पोस्टिंग की वजह से दस्तावेज सत्यापन में शामिल नहीं हुए। कई ऐसे थे जिनके पास वैकेंसी के समय निर्धारित योग्यता नहीं थी। जैसे, 2 जुलाई 2023 तक डीएलएड और टेट पास होना जरूरी था। कई उम्मीदवारों के पास इस तारीख के बाद का सर्टिफिकेट था इसलिए अपात्र हुए। कई पहले से नौकरी में थे। वे दूसरी जगह नहीं गए। नौकरी से निकाले गए बीएड डिग्रीधारियों ने सतत प्रदर्शन किया
बीएड डिग्रीधारियों को 10 जनवरी 2025 को सहायक शिक्षक के पद से हटाया गया। इसके बाद से प्रदर्शन भी शुरू हो गया था। दिसंबर में अंबिकापुर में उम्मीदवारों ने रैली निकाली, ज्ञापन दिया। नौकरी के हटाने के बाद भी रायपुर के तूता धरना स्थल पर उम्मीदवार कई दिनों तक धरने पर बैठे रहे। भास्कर ने जैसा बताया, वैसा ही हुआ बर्खास्त बीएड शिक्षकों को लेकर दैनिक भास्कर ने 13 अप्रैल को ही बता दिया था कि इन्हें प्रयोगशाला सहायक बनाया जा सकता है। खबर में बताया गया था कि इसे लेकर उच्च स्तर पर कवायद चल रही है। हल के लिए अमिताभ जैन की अध्यक्षता में समिति की बैठकें हो रही हैं।


