खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले से 80 किलोमीटर दूर मैकल पर्वतमाला में स्थित मंडीपखोल गुफा 5 मई को श्रद्धालुओं के लिए खुलेगी। यह गुफा हर साल अक्षय तृतीया के बाद पहले सोमवार को एक दिन के लिए खोली जाती है। इस दिन यहां मेले का आयोजन होता है। मंडीपखोल नाम दो शब्दों से बना है- मंडी यानी मेला और खोल यानी गुफा। यह स्थान अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। नेशनल केव रिसर्च एंड प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन और इटालियन केव रिसर्च ग्रुप ने इस गुफा का विस्तृत अध्ययन किया है। गुफा में पाए जाते है दुर्लभ जीव डॉ. जयंत विश्वास के मुताबिक, गुफा में कई दुर्लभ जीव पाए जाते हैं। इनमें पूंछ वाले चमगादड़, ब्लैंडफोर्ड रॉक अगामा, विभिन्न प्रजातियों की मकड़ियां, पिल बग और मेंढक शामिल हैं। ये जीव सूर्य की रोशनी के बिना एक विशिष्ट खाद्य श्रृंखला का हिस्सा हैं। प्राचीन काल से एक दिन खोलने की परंपरा शोध में पाया गया है कि श्रद्धालुओं की अधिक संख्या से गुफा का तापमान बढ़ जाता है। इससे कई जीव अस्थायी रूप से गुफा के भीतरी हिस्सों में चले जाते हैं। यही कारण है कि प्राचीन काल से इस गुफा को साल में केवल एक दिन खोलने की परंपरा है। इससे गुफा का प्राकृतिक इकोसिस्टम संरक्षित रहता है। मछली पकड़ने पर्यावरणविदों जताई चिंता गर्मियों में आसपास के ग्रामीण केसरिया टोमेंटोसा के फल का उपयोग पारंपरिक मछली पकड़ने में करते हैं, जो पानी में मिलाने पर मछलियों को बेहोश कर देता है। यह गुफा के जलीय इकोसिस्टम के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है, जिस पर पर्यावरणविद भी चिंता जाहिर कर चुके हैं। संभवतः इसी जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से ही पूर्वजों ने साल में एक दिन ही यहां आने की परंपरा स्थापित की, ताकि न केवल मानव जाति, बल्कि गुफा में निवास करने वाले असंख्य जीव-जंतुओं की रक्षा भी की जा सके। हजारों की संख्या में लोग पहुंचते है और यहां स्थापित भगवान शिव के दर्शन करते है। 5 मई लगेगा मेला इस साल मंडीपखोल गुफा 5 मई को खुलेगी। श्वेतगंगा, जिसे पायथन गुफा भी कहा जाता है, से निकलने वाली जलधारा को सत्रह बार पार करके हजारों श्रद्धालु मंडीपखोल तक पहुंचेंगे और प्रकृति के बीच बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे। परंपरा के अनुसार सुबह सबसे पहले ठाकुरटोला के जमींदार परिवार द्वारा पूजा की जाएगी, इसके बाद दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा। खैरागढ़ कलेक्टर इंद्रजीत चंद्रवाल ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और पुलिस प्रशासन को भी सुरक्षा के निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि यह आयोजन शांति और सुव्यवस्था के साथ संपन्न हो सके।


