विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदायों में विसंगतियों को दूर कराने की मांग को लेकर एक बार फिर इस समाज में आने वाले लोग सरकार के खिलाफ हो गए है। रविवार को घुमंतू समाज का प्रतिनिध मंडल कैबिनेट मिनिस्टर मदन दिलावर से मिला । प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने मंत्री मदन दिलावर को बताया विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदायों के बारे में सरकार ने जो नीतियां लागू की उसमें बहुत सारी विसंगतियाँ हैं , जैसे रैबारी लिया गया है जबकि देवासी और राईका नहीं लिखा है जो की एक ही समाज के पर्याय शब्द हैं इससे राईका और देवासी के जाति पहचान पत्र नहीं बन रहे हैं और समाज का एक बड़ा तबका वंचित रह जाएगा । कालबेलिया के आगे जोगी लगा दिया है जबकि दोनों समाज अलग अलग हैं , गाड़िया लुहार लिया गया लेकिन लुहार छोड़ दिया गया , बावरी लिया गया लेकिन बागरिया छोड़ दिया गया जबकि दोनों समाज एक ही हैं । मंत्री दिलावर पर अनेदखी का लगाया आरोप समन्वय समिति के अध्यक्ष लाल रायइका ने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि मंत्री ने कहा कि उनके बस की बात नहीं है आप सीएम से मिलों जबकि यह इशू मंत्री के विभाग का है। अन्य मांगों के प्रति भी मंत्री का रवैया उदासीन था । इससे लगता है की सरकार इन समुदायों को मुख्य धारा में लाना ही नहीं चाहती । 9 जनवरी को पाली में करेंगे आंदोलन उनसे मिलने के बाद समिति अध्यक्ष लालजी राईका ने प्रेस से वार्ता करते हुए बताया कि सरकार के इस उदासीन रवैये से घुमंतू समाज बहुत नाराज हैं और अभी आंदोलन के सिवाय कोई रास्ता नहीं है । समिति ने पहला आंदोलन पाली से 9 जनवरी को करने की घोषणा की जिसमें सरकार के आदेश की होली जलाई जाएगी और सरकार के ख़िलाफ़ ‘बहिष्कार’ आंदोलन किया जाएगा। विमुक्त ,घुमंतू, अर्ध घुमंतू परिषद के अध्यक्ष रतन नाथ कलबेलिया ने बताया कि हर ज़िले में आंदोलन होगा और जयपुर में महा आंदोलन करेंगे। भारत जोड़ो मिशन के अध्यक्ष अनीशष कुमार नाडर ने वर्तमान में सरकार द्वारा अभियान चलाकर पट्टे देने और जाति पहचान पत्र बनाने के कार्य की सराहना करते हुए इन कार्यों के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की मांग करते हुए बताया कि इस आंदोलन में हर समाज हिस्सा लेगा और सरकार के मांगे मानने पर मजबूर करेगा । अंतरनाथ सपेरा ने बताया कि मंत्री ने हमें कोई रास्ता नहीं बताया और सरकार को इन समुदायों के बारे में कोई चिंता नहीं है । प्रतिनिधि मंडल में बिसना जी बावरी, झालाराम जी देवासी , करना जी देवासी , किसन जी देवासी और भिकु जी देवासी मौजूद थे रोड़ी देवी बावरी आदि लोग शामिल थे। समिति ने रेनेके और ईदाते आयोगों की रिपोर्ट का भी अध्ययन किया और 9 सूत्री मांगे बनाई । ये मांगे इन दोनों आयोगों की सिफ़ारिशों के अनुसार ही हैं। उन्होंने सरकार से विसंतगतिया दूर करने की मांग की। दिलावर बोले- राजस्थान मंत्रीमंडल तय करता है कि इस सूची को स्वीकार किया जाए या नहीं वहीं कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर का कहा- घुमंतू जातियों की सूची है। एक सूची केंद्र की सूची है और दूसरी राज्य सरकार की सूची है। राज्य सरकार की सूची केंद्र सरकार जो तय करती है उस पर राजस्थान मंत्रीमंडल तय करता है कि इस सूची को स्वीकार किया जाए या नहीं स्वीकार किया जाए। क्योंकि कई जातियों कुछ प्रदेशों में होती है, जबकि कई जातियां कुछ प्रदेशों में नहीं होती है। तो राज्य सरकार उन्हें एडोप करती है मंत्री मंडल के निर्णय के अनुसार। उन्होंने बताया- उनका यह कहना है कि हमारी जाति छूट गई है उनकों जोड़ा जाए। हालांकि यह मेरे को अधिकार नहीं। ऐसे मामले में आयोग बैठता है और इसके बाद भारत सरकार इस पर विचार करती है। उन्होंने मुझ पर आरोप लगाया कि मैं मामले को टाल रहा हूं, ऐसा नहीं है। यदि राजस्थान का मंत्री मंडल इस मामले में निर्णय करेगा तो ही इससे कुछ होगा। वहीं भारत सरकार सूची भेजेगी और उन जातियों का नाम होगा। तब ही इन नामों को शामिल किया जा सकेगा। आंदोलन की चेतावनी पर दिलावर बोले की मैंने उनको न्याय की बात बता दी, तरीका भी बता दिया। हालांकि वो स्वतंत्र है कि उनको क्या करना है।
डीएनटी मांग पत्र
डीएनटी समाज को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थाओं में 10% आरक्षण दिया जाये जिसकी सिफ़ारिश रेनके आयोग ने भी की है । राजस्थान में इन जातियों की अनुमानित जनसंख्या क़रीब 15% है इसलिए 10% आरक्षण की माँग उचित है । इन जातियों में अधिकतर अनुसूचित जाति , अनुसूचित जन जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल है लेकिन इनको कोई लाभ नहीं मिल रहा है इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय “ आरक्षण के भीतर आरक्षण “ के तहत इन समाजों को अलग से आरक्षण दिया जाना चाहिए ।
पंचायती राज्य संस्थाओं और शहरी निकायों में इनके लिए 10% सीटें आरक्षित की जाये । क्योंकि ये जातियों बिखरी हुई हैं इसलिए एक साथ वोट नहीं कर पाती हैं , इसलिए इन्हें प्रतिनिधित्व देने के लिए 10% सीट राज्य सभा में आरक्षित किया जाये ।
जहां पर इनके आवास हैं या बाडा है उसी को नियमित किया जाए ।
आवासहीनों को शहर में 100 वर्ग गज और गाँवों में 300 वर्ग गज आवास के लिए और 300 वार गज पशुओं के बाड़े के लिए दी जाये ।
शिक्षा के लिए शिक्षा बजट का 10 % हिस्सा अलग किया जाये और उसमें से इनके लिए आवासीय विद्यालय , कला महाविद्यालय , महा आंगनबाड़ी , हॉस्टल, कौशल कॉलेज आदि खोले जायें ।
उन्हें “ कहीं भी शिक्षा ( anywhere education) का प्रावधान किया जाये और उनके बच्चों को “ शिक्षा अधिकार ( right to education) में प्राइवेट स्कूल में प्रवेश में प्राथमिकता दी जाये और उनकी फ़ीस की सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति की जाये । महिलाओं और युवाओं को आधुनिक उद्योग जैसे इलेक्ट्रॉनिक , कंप्यूटर मैन्यूफैक्चरिंग में ट्रेनिंग देकर रोज़गार दिया जाये क्योंकि इन जातियों में बचपन से ही कला की प्रवति होती है इसलिए इन उद्योगों के लिए वे कुशल कर्मचारी साबित होंगे । सभी प्राइवेट उद्योगों को इस समाजों को रोज़गार देने का लक्ष्य दिया जाये ।
प्रति वर्ष 1000 विद्यार्थियों को विदेश में शिक्षा के लिए भेजा जाये जिसका पूरा खर्च सरकार वहन करे ।
इनके लिए अलग मंत्रालय, वित्त निगम और लोन की सुविधा होनी चाहिए ।


