जब जब धर्म की होती है हानि भगवान धरती पर होते हैं अवतरित: देवी गौर प्रिया

भास्कर न्यूज | पत्थलगडा हरि की भक्ति से ही मानव का कल्याण संभव है। जब जब धर्म की हानि होती है।भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। यह बातें वृंदावन धाम की राष्ट्रीय कथावाचिका देवी गौर प्रिया ने कही। पत्थलगडा के नावाडीह स्थित पर्यटन स्थल मोरशेरवा पहाड़ी पर आयोजित नौ दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा सह रूद्रचंडी महायज्ञ में श्रद्धालुओं को श्रीभागवत कथा पान कराते हुए उन्होंने मानव जन्म और मोक्ष पर विस्तृत जानकारी दी। कथा वाचिका किशोरी गौर प्रिया ने अपने कथा पाठ के प्रथम दिवस पर द्वापर युग की समाप्ति और कलयुग के प्रवेश का प्रसंग सुनाया। उन्होंने प्रभु श्री हरि की भक्ति से ही मानव जीवन के कल्याण को संभव बताते हुए कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरा पर आये हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वापर युग के सूर्य थे। बाल काल में ग्वालों के साथ माखन चुराया। बड़े होने पर अर्जुन को गीता का उपदेश देकर अधर्म के विरुद्ध धर्म की विजय करवाई। इसके बाद वह इस धरा से विदा ले लिया। उन्होंने कहा कि जब धर्मराज युधिष्ठिर को सब कुछ सूना लगने लगा तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें धर्म का रास्ता दिखाया। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में से मनुष्य योनि को ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह एक ऐसी यानी है जिसके माध्यम से कठोर तप करके ईश्वर के दर्शन तक हो सकते हैं। इसलिए मनुष्य को नित्य भगवान का ध्यान करना चाहिए। देर रात तक श्रद्धालु संगीतमय कथा का श्रवण किया। महायज्ञ को लेकर पहाड़ी पर भक्ति और श्रद्धा देखते ही बन रही है। काफी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर महायज्ञ में शामिल हो रहे हैं। पहाड़ी पर भंडारे का भी आयोजन किया गया है। भंडारे में प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *