भास्कर न्यूज | जशपुरनगर अप्रैल में हुई बारिश के बाद मई के पहले सप्ताह में भी बारिश हो रही है। इस वजह से अबतक जशपुर इलाके में तापमान में कोई खास बढ़ोत्तरी नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर लीची के उत्पादन पर देखने को मिल रहा है। लीची के फल में मिठास नहीं घुल पाई है। ओलावृष्टि की वजह से भी कई जगहों पर फल खराब हुए हैं। जशपुर जिले में लीची का कारोबार करीब 10 करोड़ से अधिक रुपयों का है। बाजार में लीची के फल आने शुरू हो गए हैं। पर इस बार लीची की पूछपरख नहीं है। क्योंकि बाजार में अबतक आई लीची खट्टे निकले हैं। लीची बेचने पहुंच रहे किसान इसे आधे दाम में बेचकर जा रहे हैं। बीते साल जो लीची 20 रुपए दर्जन में बिक रही थी। अब विक्रेता 10 रुपए दर्जन में इसे बेचकर लौट रहे हैं। शहर के गोविंद मिश्रा बताते हैं कि लीची का इंतजार उन्हें हर गर्मी में होता है। लीची बाजार में आ रहे हैं वे साईज में छोटे हैं और खट्टे हैं। मोहन साव का कहना है कि कई लीची बीच से फटे हुए आ रहे हैं। किसान सुरजन राम का कहना है कि इस बार सही ढंग से गर्मी नहीं पड़ने की वजह से फल का यह हाल हुआ है। कई इलाकों में लीची के बीच से फटने की समस्या आ रही है। यह लीची में पानी की मात्रा अधिक होने की वजह से हो रहा है। फ्रूट क्रेकिंग कई जगहों पर पहले चरण में तो कई जगह पर दूसरे चरण में पहुंच चुकी है। प्रारंभिक चरण में, फल की सतह पर एक भूरे रंग की पट्टी दिखाई देने लगती है और फल की सतह चटक जाती है। फिर, एक दरार दिखाई देती है। यह करें उपाय: कृषि विज्ञान केन्द्र डूमरबहार से मिली जानकारी के अनुसार फलों को चटकने से बचाने के लिए 15 से 20 दिनों बाद बोरेक्स (4 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव करने की सलाह किसानों को दी गई है। 33 सौ एकड़ में उत्पादन जशपुर जिले में लीची का उत्पादन 33 सौ एकड़ भू-भाग पर होता है। करीब 10 करोड़ से अधिक का कारोबार लीची का हर साल होता है। इस बार लीची में आई खटास से किसान मायूस हैं। क्योंकि लोकल बाजार में इसे आधे दाम में खरीदने को भी लोग तैयार नहीं हो रहे हैं। हर साल जशपुर की लीची रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, जमशेदपुर, पटना, झाड़सुगड़ा, सुंदरगढ़, राउरकेला जैसे इलाकों में भेजी जाती है। इस बार यदि खटास की वजह से लीची बाहर नहीं गई तो किसान लीची से होने वाली अतिरिक्त आमदनी से वंचित हो जाएंगे।


