19 हजार हैंडपंप और बोरिंग से ग्राउंड वाटर का दोहन, गिर रहा भू-जल स्तर

भास्कर न्यूज | बैकुंठपुर हर साल कोरिया व एमसीबी जिले में पेयजल संकट बढ़ रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि दोनों जिलों में अब तक पांच हजार से अधिक निजी बोर और लगभग 14 हजार हैंडपंप के लिए बोरिंग के माध्यम से ग्राउंड वाटर का दोहन किया जा रहा है। जलस्रोतों के इस अंधाधुंध दोहन के कारण भू-जल स्तर डेंजर जोन में चला गया है। स्थिति यह है कि कई गांवों में 400 फीट गहराई पर भी पानी नहीं मिल रहा है, जबकि एमसीबी जिले के ब्लॉक खड़गवां के 44 गांवों को ड्राय जोन घोषित किया जा चुका है। प्रतिबंध के बाद भी बिना अनुमति के ही धड़ल्ले से निजी बोरिंग की जा रही है। प्रशासन की ओर से निजी बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में लगातार बोरिंग कार्य हो रहे हैं। यह काम या तो चोरी-छिपे रात के समय किया जा रहा है या फिर प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से खुलेआम जारी है। ऐसे मामलों में न तो संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई कठोर कार्रवाई हो रही है, ना ही मॉनिटरिंग ही दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक सीमित क्षेत्र में इतनी अधिक संख्या में बोरिंग का कार्य भू-जल संरचना को पूरी तरह से तोड़ देता है। इससे जल स्रोतों के ​िरचार्ज की प्रक्रिया बाधित होती है और जमीन के अंदर पानी का संग्रहण क्षेत्र सिकुड़ता रहा है। इसका असर सिर्फ वर्तमान पीढ़ी पर ही नहीं, आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। हैरानी की बात यह कि पटना तहसील में अमहर डैम के आसपास की ग्राउंड वाटर नहीं मिल रहा है। एक दशक में ग्राउंड वाटर को ​िरचार्ज करने कागजों में ही उपाय किए गए कोरिया और एमसीबी जिले में करीब 14 हजार हैंडपंप अब तक लगाए जा चुके हैं। इनमें से आधे ड्राय हो चुके हैं या खराबी की वजह से बंद पड़े हैं। यहां करीब 19 हजार बोरिंग और 1 हजार कुआं खोदकर ग्राउंड वाटर का दोहन किया जा रहा है, जबकि बीते एक दशक में ग्राउंड वाटर को ​िरचार्ज करने कागजों में ही उपाय किए गए हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि कई गांवों में ग्राउंड वाटर 400 फीट के नीचे चला गया है। निजी बोरिंग पर लगी रोक, सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य : कलेक्टर ^कोरिया जिले में कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने जन सहयोग से ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने और वर्षा जल संचय के लिए आवा पानी झोंकी अभियान शुरू किया है। इसके तहत शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में पौधरोपण समेत पीएचई व वन विभाग द्वारा जंगल में बहने वाले नदी-नालों पर स्टॉप डैम निर्माण कराया जा रहा है, जिससे आसपास के हैंडपंप, कुआ जीवित हो सके। वहीं निजी बोरिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है। नए बनने वाले सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। खड़गवां विकासखंड के ये गांव ड्राय जोन में शामिल एमसीबी जिले के ब्लॉक खड़गवां का ग्राम कोड़ा, मेंड्रा, धवलपुर, पैनारी, देवाडांड, सलका, फुनगा, बेलबहरा, कटकोना, जरोंधा, सकड़ा, सेंधा, पीपरबहरा, उधनापुर, आमाडांड, तामडांड ग्राम पंचायत में ग्रामीणों को हर साल गर्मी के आते ही पेयजल समस्या को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता था। कारण यह है कि हर साल सबसे कम बारिश इसी ब्लॉक में होती है।

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