हरियाणा के ओलिंपियन बॉक्सर विजेंदर प्रेमानंद महाराज से मिले:पत्नी ने पूछा- मुझे जरा-जरा सी बातों पर डर लगता है, कई बार ऐसी बात नहीं होती

हरियाणा के भिवानी जिले के रहने वाले बॉक्सर विजेंदर के परिवार ने वृंदावन जाकर प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए हैं। बॉक्सर विजेंदर के साथ उनकी पत्नी अर्चना सिंह और बच्चे भी थे। बॉक्सर विजेंदर ने सबसे पहले महाराज से उनकी सेहत के बारे में पूछा। इस पर महाराज ने कहा कि हम ठीक हैं। इसके बाद विजेंदर सिंह ने कहा कि मेरी पत्नी आपसे कुछ पूछना चाहती है। महाराज ने कहा कि हां, पूछो। विजेंदर सिंह की पत्नी अर्चना सिंह ने कहा महाराज जी मुझे जरा-जरा सी बातों पर डर लगता है। कई बार डरने की कोई बात भी नहीं होती मगर फिर डर लगने लगता है। बता दें कि बॉक्सर विजेंदर ने दिल्ली की रहने वाली अर्चना सिंह से शादी की थी। अर्चना ने सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल की पढ़ाई की है। 17 मई, 2011 को विजेंदर ने लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड रही अर्चना सिंह से शादी की थी। प्रेमानंद महाराज ने विजेंदर सिंह की पत्नी से यह कहा… अर्चना सिंह : महाराज जी मुझे जरा-जरा सी बातों पर डर लगता है। कई बार डरने की कोई बात भी नहीं होती?
प्रेमानंद महाराज : हमारी नकारात्मक सोच जब बढ़ने लगती है तो भय, चिंता, शोक प्रदान करते हैं। इसी को नष्ट करने के लिए हम करते हैं कि राधा-राधा नाम जप लिया करो। अगर राधा-राधा जपेंगी तो आप खुद देखेंगी सोच में परिवर्तन हो रहा है। क्योंकि सच्चिदानंद में राधा नाम अपना प्रभाव दिखाता है। जैसे हमारी दोनों किडनियां खराब हैं। लेकिन हमारे अंदर नकारात्मक सोच नहीं है। इसलिए मैं प्रसन्न रहता हूं और स्वस्थ्य जैसा रहता हूं। अगर नकारात्मक सोच आ जाए तो अभी हम परेशान हो जाएंगे। यह राधा नाम ही हमको स्वस्थ रखे हुए है। राधा नाम ही हमें नकारात्मक सोच और भय से बचाए हुए है। राधा नाम से दसों दिशाएं आनंदमय हो जाएंगी। प्रेमानंद महाराज ने विजेंदर से पूछा क्या आपको नजर आता है मैं बीमार हूं। स्वस्थ पुरुष जैसा लगता हूं। 4 महीने पहले पिता का निधन हो गया था
ओलिंपिक मेडलिस्ट बॉक्सर विजेंदर सिंह के पिता महिपाल सिंह का 4 महीने पहले निधन हो गया था। वह कैंसर से पीड़ित थे। उनके पिता हरियाणा रोडवेज में बस ड्रा‌इवर थे। वह वर्ष 2019 में रिटायर हुए थे। इंटरनेशनल बॉक्सर और भाजपा नेता विजेंदर कई बार बता चुके हैं कि उनकी कामयाबी में उनके पिता का बड़ा योगदान रहा है। कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने विजेंदर की परवरिश की। परिवार चलाने के लिए वह ओवर टाइम करते थे, ताकि कुछ ज्यादा पैसे मिल सकें। पिता की मौत के बाद से ही विजेंदर सिंह का परिवार काफी टूट चुका है। दिल्ली और हरियाणा चुनाव में नहीं मिला टिकट
विजेंदर सिंह ने 2019 में कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। पहले ही चुनाव में पार्टी ने उन्हें दक्षिण दिल्ली से मैदान में उतारा। इस चुनाव में उन्हें भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद विजेंदर सिंह राजनीति में उतने एक्टिव नहीं रहे। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए। मगर भाजपा से भी उनको ना तो दिल्ली में टिकट मिला और ना ही हरियाणा में उनको पार्टी ने टिकट दिया। हालांकि वह अभी भी राजनीति में इतने सक्रिय नहीं है। हरियाणा सरकार ने दी थी DSP की पोस्ट
पूर्व भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने बॉक्सिंग में विजेंदर की उपलब्धियों के चलते उन्हें सम्मान के तौर पर हरियाणा पुलिस में डीएसपी की पोस्ट दी थी। 2008 में विजेंद्र ने बीजिंग ओलिंपिक में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद हुड्डा सरकार ने उन्हें हरियाणा पुलिस सर्विस (HPS) में शामिल किया था। 2015 में पेशेवर मुक्केबाज बनने के दौरान भी उनके DSP पद को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, लेकिन सरकार ने उन्हें DSP स्पोर्ट्स के पद पर बरकरार रखा था। हालांकि 6 साल पहले उन्होंने खुद ही इस्तीफा दे दिया। कॉलेज के दिनों से था मुक्केबाजी का शौक
29 अक्टूबर, 1985 में हरियाणा के भिवानी में जन्में विजेंदर के पिता महिपाल सिंह बेनीवाल हरियाणा रोडवेज में बस ड्राइवर हैं। उनकी मां गृहिणी हैं। विजेंदर बेहद निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से जुड़े हैं। विजेंदर सिंह को कॉलेज के दिनों से ही मुक्केबाजी और कुश्ती का शौक था, वह इसकी प्रैक्टिस भिवानी बॉक्सिंग क्लब में करते थे। उन्होंने कोचिंग का प्रशिक्षण भारतीय बॉक्सिंग कोच गुरबख्श सिंह संधू से लिया हैं। बॉलीवुड में भी रहे एक्टिव
विजेंदर सिंह ने एक्टर के रूप में बॉलीवुड में अपनी शुरुआत 13 जून 2014 को रिलीज हुई फिल्म फगली से की थी। फिल्म का निर्माण ग्रेजिंग गोट प्रोडक्शंस द्वारा किया गया है, जिसके मालिक अक्षय कुमार और अश्विनी यार्डी हैं। हालांकि उनकी इस फिल्म को औसत से ऊपर रिव्यू मिले थे। इससे पहले 2011 में दक्षिण भारतीय डायरेक्टर आनंद द्वारा बनाई जाने वाली एक फिल्म को लेकर भी चर्चा शुरू हुई थी, लेकिन बाद में विजेंदर सिंह ने ही इसकी पुष्टि नहीं की।

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