यदुनंदन सरस्वती बोले- बिना धर्म के राजनीति शून्य है:वृंदावन धाम के पीठाधीश्वर ने कहा-दीक्षा देने शंकराचार्यों ने खोली है फैक्ट्री, आम लोगों की पहुंच से हैं दूर

पीठाधीश्वर व वृन्दावन धाम के स्वामी यदुनंदन सरस्वती का कहना है कि धर्म गुरुओं को धर्म आधारित राजनीति करनी चाहिए। केवल अपनी प्रतिष्ठा के लिए राजनीति करना गलत है। उन्होंने शंकराचार्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ज्यादातर शंकराचार्य या तो विवाद में रहे हैं या फिर उस योग्यता को पूरी नहीं करते हैं। ऐसे शंकराचार्यों ने दीक्षा देने की फैक्ट्री खोल रखी है, जो आम लोगों की पहुंच से हमेशा दूर रहते हैं। छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए यदुनंदन महराज ने बिलासपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पहलगाम और आतंकवाद का सृजन मुसलमानों के यहां से हुआ है। जितने भी आतंकवाद हैं, सभी इस्लामी है। इन्हें रोकने के लिए सरकार के पास कठोर कानून है। सरकार को गरम होना चाहिए और तत्काल निर्णय लेना चाहिए। बिहार चुनाव के चलते अवसर की तलाश में है पीएम मोदी
उन्होंने कहा कि पहलगाम की घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अवसरवाद की तलाश में है। बिहार का चुनाव आए तो थोड़ा धूम-धड़ाम कर लेंगे। जिससे उनको हिंदुओं का वोट मिले। जबकि, अभी के हालात में उन्हें प्रतीक्षा नहीं करनी चहिए। देन एंड देयर जवाब देना चाहिए। आय का साधन हो गया है गीता भागवत
वर्तमान समय में मीडिया और सोशल मीडिया के दौर में श्रीमद भागवत कथा को लोगों ने मनोरंजन और आय का साधन बना लिया है। भागवत कहने के लिए भी योग्यता निर्धारित है। 10 साल पहले जो भागवत होता था, तब सुबह तीन से चार और शाम को तीन से चार घंटे प्रवचन होता था। लेकिन, अब केवल तीन से चार घंटे में कथा हो जाती है, उसमें भी संगीत और नाचगान में ज्यादा टाइम बीत जाता है। इस तरह की धार्मिकता केवल मनोरंजन और आय का साधन बन गया है। हिंदू धर्म को कभी खतरा नहीं रहा
उन्होंने कहा कि जब तक सृष्टि है तब तक संसार में हिंदू और सनातन रहेगा। हिंदू और सनातन को कहीं कोई खतरा नहीं है। कुछ दुराग्रही, जो छोटे-मोटे कीड़े मकोड़े हैं, उनसे हमारे धर्म को कहीं कोई खतरा नहीं है। हिंदु राष्ट्र की उठती मांग पर कहा कैलाश शिखर से लेकर कश्मीर से कन्याकुमारी और कटक के बीच पहले ही यह हिंदू राष्ट्र है फिर कोई बनाए या ना बनाएं फर्क नहीं पड़ता। साधु, संत हमेशा सनातन धर्म की रक्षा करते हैं और करते रहेंगे।

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